Edited By Tanuja,Updated: 01 Feb, 2026 11:43 AM

भारत का 2026-27 बजट वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण रूप ले रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया, निवेशक और निर्यातक इसे न सिर्फ घरेलू विकास के लिये, बल्कि भूराजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार बदलाव, और भारत की बढ़ती आर्थिक भूमिका के संदर्भ में भी देख रहे...
International Desk: अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसियों और एनालिस्टों की टिप्पणियों के अनुसार, बजट 2026 ऐसे समय में पेश किया जा रहा है जब दुनिया भर में भूराजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता व्याप्त है। भारत का Union Budget 2026-27 न सिर्फ देश के लिये, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, निवेशकों, गरीब-मध्यम वर्ग और निर्यातकों के लिये भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषक इसे महत्वपूर्ण आर्थिक संकेत और वैश्विक नेतृत्व भूमिका की दिशा में कदम के रूप में देख रहे हैं। है। भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले काफी मजबूत बताया जा रहा है ।
भारतीय निर्यातकों ने कहा है कि बजट से घरेलू बाजार में मजबूती, टैक्स प्रोत्साहन और निवेश सहायता की उम्मीद है, खासकर तब जब वैश्विक टैरिफ और आर्थिक दबाव से निर्यात पर असर पड़ रहा है। उनके अनुसार बजट में इन सब पर ध्यान देना जरूरी है ताकि भारत के उत्पाद वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बने रहें।
अंतर्राष्ट्रीय निवेशक बजट के आंकड़ों और संभावित नीतियों की ओर ध्यान दे रहे हैं खासकर अधोसंरचना निवेश, टैक्स सुधार, और वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने वाले उपायों पर। इसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी देखा जा रहा है, जहां बजट से पहले अस्थिरता और सतर्कता बनी हुई है। भारत का बजट केवल आर्थिक नीतियों तक सीमित नहीं है यह अब भूराजनीतिक संकेतों का भी एक हिस्सा बनता जा रहा है। युद्धों और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच बजट के फैसले रक्षा, टेक्नोलॉजी, और निर्यात-आधारित उद्योगों को सपोर्ट करने की दिशा में देखे जा रहे हैं।
क्यों हर साल 1 फरवरी को ठीक 11 बजे ही पेश होता देश का बजट?
भारत का केंद्रीय बजट हर साल 1 फरवरी को सुबह 11 बजे संसद में पेश किया जाता है। चाहे वह कार्यदिवस हो या रविवार, सरकार इस तय समय-सारिणी से पीछे नहीं हटती। इसके पीछे ऐतिहासिक, प्रशासनिक और वित्तीय कारण जुड़े हुए हैं। भारत का वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होता है। ऐसे में 1 फरवरी को बजट पेश करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संसद को बजट पर चर्चा, संशोधन और मंजूरी के लिए पर्याप्त समय मिल सके। इससे केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और विभिन्न मंत्रालयों को नई योजनाओं और नीतियों को समय पर लागू करने की तैयारी का अवसर मिलता है। हालांकि, यह व्यवस्था हमेशा से नहीं थी। ब्रिटिश शासन के दौरान बजट फरवरी के आखिरी कार्यदिवस को पेश किया जाता था, जिससे कई बार योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी हो जाती थी।

अरुण जेटली ने बदली परंपरा
इस परंपरा को 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बदल दिया और बजट को फरवरी के पहले दिन पेश करने की शुरुआत हुई।बजट के समय में भी बड़ा बदलाव हुआ। पहले बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था, ताकि ब्रिटेन के कारोबारी समय से तालमेल बना रहे। लेकिन 1999 में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस औपनिवेशिक परंपरा को खत्म करते हुए बजट को सुबह 11 बजे पेश करने की शुरुआत की। इससे संसद में उसी दिन विस्तृत बहस संभव हो सकी। यदि 1 फरवरी रविवार या अवकाश के दिन पड़ता है, तब भी बजट उसी दिन पेश किया जाता है। यह सरकार की समयबद्ध वित्तीय योजना और प्रशासनिक अनुशासन को दर्शाता है।

रविवार को भी बजट क्यों?
यदि 1 फरवरी रविवार हो, तब भी बजट उसी दिन पेश किया जाता है। यह सरकार की समयबद्ध वित्तीय योजना और प्रशासनिक अनुशासन को दर्शाता है। 2026 में भी बजट रविवार को पेश किया गया, जो इसी प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
- 1 फरवरी समय पर क्रियान्वयन के लिए
- 11 बजे भारतीय व्यवस्था के अनुसार
- ब्रिटिश परंपरा से हटकर स्वतंत्र भारत का निर्णय