महात्मा गांधी का आखिरी दम तक रहा ट्रेन से खास रिश्ता

Edited By Updated: 28 Sep, 2019 04:17 PM

south africa mahatma gandhi station train

भारत में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान ईस्टर्न इंडिया रेलवे कंपनी ने रेल सेवाओं की शुरुआत की। दक्षिण अफ्रीका में रेल के डिब्बे से नीचे उतारे गए महात्मा गांधी का भारतीय रेलवे से अनूठा रिश्ता रहा।  देश में रोलेट एक्ट को लेकर हंगामा चल रहा था और बापू ने इसे...

नई दिल्ली: भारत में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान ईस्टर्न इंडिया रेलवे कंपनी ने रेल सेवाओं की शुरुआत की। दक्षिण अफ्रीका में रेल के डिब्बे से नीचे उतारे गए महात्मा गांधी का भारतीय रेलवे से अनूठा रिश्ता रहा।  देश में रोलेट एक्ट को लेकर हंगामा चल रहा था और बापू ने इसे भांपते हुए दिल्ली जंक्शन से पंजाब जाने की घोषणा कर दी। रेलगाड़ी से उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत की लेकिन उन्हें पलवल में ही गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा दिल्ली जंक्शन, हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, शाहदरा सहित दिल्ली के कई रेलवे स्टेशन हैं जहां महात्मा गांधी ने अपनी यात्राओं को या तो विराम दिया या वहां से शुरुआत की। 

इन स्टेशनों के इतिहास में यहां बेशक कोई रिकॉर्ड ना हो लेकिन ‘गांधी जी की दिल्ली की  डायरी’ में इसका जिक्र जरूर है। जलियांवाला बाग से व्यथित बापू जब 23 अक्तूबर 1919 को लाहौर जा रहे थे तो दिल्ली जंक्शन से ही उन्होंने अपनी रेल यात्रा शुरू की। 15 जून 1920 को दिल्ली रेलवे जंक्शन से पंजाब जाते समय उन्हें विदा करने के लिए अंग्रेजी हुकूमत के स्टेशन मास्टर भी खड़े हुए थे। बापू जब भी पंजाब अथवा लाहौर गए उन्होंने रेल के सफर को ही प्राथमिकता दी।  उन्होंने रावलपिंडी के लिए 8 फरवरी 1925 को चले तो दिल्ली से ही उन्होंने अपना सफर शुरू किया । उनकी कई रेल यात्राओं का उल्लेख रेलवे के इतिहास में है तो दिल्ली डायरी भी बताती है कि 9 अप्रैल 1931 को अमृतसर से जब महात्मा गांधी वापस आए तो उन्होंने अपनी यात्रा को पुरानी दिल्ली में ही विराम दिया।  

इसके बाद उन्होंने 1 माह के अंतराल में 17 जुलाई 1931 व 24 अगस्त 1931 को भी शिमला का सफर रेलगाड़ी से ही तय किया। बापू देशभर में आजादी के अलख जगाने के लिए घूम रहे थे फिर चाहे इलाहाबाद हो, मुंबई या एबटाबाद। उन्होंने दर्जनों रेल यात्राएं दिल्ली जंक्शन से ही शुरू की। रेलवे के एक पूर्व अधिकारी बताते हैं कि जब उन्होंने रेल सेवा शुरू की थी तब महात्मा गांधी के बारे में पुरानी दिल्ली पर कई लोग बातें किया करते थे। वरिष्ठ रेल सेवा के अधिकारी जिन्होंने बापू को आते-जाते देखा या फिर जिन्होंने बापू के बारे में सुना उनके पास कई किस्से थे। 

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