Edited By Pardeep,Updated: 01 Feb, 2026 11:24 PM

रविवार (1 फरवरी 2026) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। इस बजट में भारत की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों की झलक भी साफ दिखी।
नेशनल डेस्कः रविवार (1 फरवरी 2026) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। इस बजट में भारत की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों की झलक भी साफ दिखी।
विदेश मंत्रालय के बजट में मामूली बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने “नेबरहुड फर्स्ट” (पड़ोसी पहले) नीति के तहत विदेशी सहायता के लिए 22,118.97 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। पिछले साल यह राशि 20,516.61 करोड़ रुपये थी। यानी कुल मिलाकर पड़ोसी और मित्र देशों के लिए भारत का खर्च बढ़ा है, लेकिन इसका बंटवारा पहले जैसा नहीं रहा। कुछ देशों को ज्यादा पैसा मिला, जबकि बांग्लादेश और मालदीव को झटका लगा है।
बांग्लादेश को बड़ा झटका क्यों?
भारत ने बजट 2026-27 में बांग्लादेश के लिए सहायता 120 करोड़ से घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दी है। यानी आधी कर दी गई है।
यह कटौती ऐसे समय में हुई है जब शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा है। भारत-बांग्लादेश के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। पिछले साल आवंटित 120 करोड़ रुपये में से केवल 34 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए थे, जिससे यह भी संकेत मिलता है कि योजनाएं पूरी तरह लागू नहीं हो पाईं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कटौती कूटनीतिक संदेश भी हो सकती है।
भूटान पर भारत की खास मेहरबानी
इसके उलट, भारत ने अपने सबसे भरोसेमंद पड़ोसी भूटान के लिए सहायता बढ़ाकर 2,288.55 करोड़ रुपये कर दी है। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि भारत-भूटान के रिश्ते बेहद मजबूत हैं। दोनों देशों के बीच हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। सड़क, बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में भारत बड़ा निवेश कर रहा है। भूटान को दी गई यह राशि पड़ोसी देशों में सबसे ज्यादा है।
अफगानिस्तान के लिए तीन गुना बढ़ी मदद
तालिबान शासन के बावजूद भारत ने अफगानिस्तान के लिए सहायता 50 करोड़ से बढ़ाकर 150 करोड़ रुपये कर दी है।
भारत इस पैसे का इस्तेमाल करेगा:
इससे साफ है कि भारत की नीति राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय है।
नेपाल और श्रीलंका के लिए सरकार ने खोली तिजोरी
नेपाल
यह बढ़ोतरी सीमा सड़क परियोजनाओं, बिजली और विकास कार्यों के लिए मददगार होगी।
श्रीलंका
हाल ही में भारत ने चक्रवात दित्वाह के दौरान श्रीलंका को राहत सहायता दी थी। नए बजट में यह सहयोग और बढ़ाया गया है।
मंगोलिया और मॉरिशस को बड़ा फायदा
यह दिखाता है कि भारत हिंद महासागर और एशिया में अपनी रणनीतिक साझेदारी मजबूत कर रहा है।
सेशेल्स, म्यांमार और मालदीव का क्या हुआ?
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सेशेल्स: बजट पहले जैसा ही 19 करोड़ रुपये
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म्यांमार: 300 करोड़ रुपये की सहायता जारी
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मालदीव: 550 करोड़ रुपये की सहायता, लेकिन 8% की कटौती
मालदीव के साथ हाल के राजनीतिक तनाव और भारत-विरोधी रुख के कारण यह कटौती की गई मानी जा रही है।
कुल मिलाकर बजट का संदेश क्या है?
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दोस्तों को ज्यादा, नाराज पड़ोसियों को कम – भूटान, नेपाल, श्रीलंका और अफगानिस्तान को फायदा, जबकि बांग्लादेश और मालदीव को झटका।
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मानवीय कूटनीति मजबूत – खासकर अफगानिस्तान और श्रीलंका के मामले में।
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हिंद महासागर पर फोकस – मॉरिशस और मंगोलिया पर खास ध्यान।
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नेबरहुड फर्स्ट जारी – कुल बजट बढ़ा, लेकिन प्राथमिकताएं बदलीं।