एक रणनीतिक कदम: फोनपे द्वारा आईपीओ को टालने का निर्णय मूल्यांकन के आधार पर नहीं, बल्कि बहुत सोच-समझ कर लिया गया है

Edited By Updated: 25 Mar, 2026 12:17 AM

a strategic move phonepe s decision to postpone ipo was not based on valuation

फोनपे ने अपने आईपीओ को कुछ समय के लिए टाल दिया है। जिसके बाद, बाजार में कुछ लोग इस विलंब को ‘वैल्युएशन मिसमैच’ के रूप में देख रहे हैं। हालाँकि, अगर मौजूदा ग्लोबल आर्थिक परिस्थितियों को करीब से देखा जाए, तो कंपनी के आंतरिक सिद्धांतों के मुताबिक आईपीओ...

(वेब डेस्क): फोनपे ने अपने आईपीओ को कुछ समय के लिए टाल दिया है। जिसके बाद, बाजार में कुछ लोग इस विलंब को ‘वैल्युएशन मिसमैच’ के रूप में देख रहे हैं। हालाँकि, अगर मौजूदा ग्लोबल आर्थिक परिस्थितियों को करीब से देखा जाए, तो कंपनी के आंतरिक सिद्धांतों के मुताबिक आईपीओ को टालने का यह कदम शॉर्ट-टर्म सुर्खियों में आने की बजाय दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता देने के कारण उठाया गया है।

ग्लोबल परिस्थितियाँः टाईमिंग है महत्वपूर्ण: 
कंपनी का आधिकारिक पक्ष बाहरी वातावरण पर केंद्रित है। फोनपे ने स्पष्ट कर दिया है कि आईपीओ को टालने का यह फैसला बाजार की मौजूदा अस्थिरता के कारण लिया गया है। आज जहाँ पश्चिम एशिया के तनाव और ग्लोबल इकोनॉमिक शिफ्ट के कारण पूंजी बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव हो रहे हैं, तो ऐसे समय में आईपीओ जारी करने की जल्दबाजी जोखिमपूर्ण हो सकती है।

वैल्युएशन के कारण देर होने की अफवाहों के जवाब में फोनपे का आधिकारिक बयान स्पष्ट हैः ‘‘हमने इस प्रक्रिया को केवल बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के कारण टाला है, जिनका फोनपे से कोई संबंध नहीं है। आईपीओ को टालने का फैसला वैल्युएशन या फोनपे की किसी अन्य समस्या से जुड़ा होने के बारे में कोई भी धारणा बिल्कुल आधारहीन है।

निवेशकों की रायः ‘‘इस फैसले के टलने की उम्मीद थी’’
फिनटेक सेक्टर पर नजर रखने वाले संस्थागत निवेशकों का कहना है कि उन्हें आईपीओ को टाले जाने के इस फैसले की उम्मीद थी। यह एक समझदार निर्णय है। कई निवेशकों के मुताबिक बाजार की मौजूदा अस्थिरता में किसी भी लार्ज-स्केल आईपीओ का मूल्य निर्धारित करना बहुत मुश्किल है। एक वेंचर पार्टनर ने कहा, ‘‘जब विश्व में आर्थिक माहौल इतना ज्यादा अस्थिर हो, तो नियम यह है कि मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों को स्थिरता आने का इंतजार करना चाहिए।’’ बाजार के विश्लेषकों के अनुसार, एक बार जब विश्व में ‘‘अनिश्चितता के बादल’’ छँट जाएंगे, तब बाजार में स्वाभाविक रूप से उन कंपनियों का महत्व बढ़ जाएगा, जिनके अपनी मैरिट पर अच्छे फंडामेंटल हैं। एक अन्य निवेशक ने इस विलंब को एक ‘‘अस्थायी और स्मार्ट कदम’’ बताया है, जिससे कंपनी को मौजूदा भूराजनैतिक उथल-पुथल के कारण होने वाली ‘‘पैनिक प्राईसिंग’’ से बचने में मदद मिलेगी।

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    मजबूत रैगुलेटरी और ऑपरेशनल रनवे:
    फोनपे अपनी मौजूदा अद्वितीय स्थिति के साथ इंतजार करने में सक्षम है। अन्य स्टार्टअप, जिन्हें पूंजी की सख्त जरूरत के कारण पब्लिक लिस्टिंग करनी पड़ती है, वहीं फोनपे इस चरण में प्रवेश अपनी मजबूत फाईनेंशियल स्थिति के साथ कर रहा है।

    •    18 महीने की विंडोः जनवरी, 2026 में सेबी की अनुमति पाने के बाद कंपनी के पास अपनी लिस्टिंग जारी करने के लिए 18 महीने की लंबी विंडो है। इसलिए कंपनी के पास जल्दबाजी में आईपीओ जारी करने की बजाय, मैरिट पर आधारित बाजार का इंतजार करने के लिए पर्याप्त समय है। 

    •    फ्री कैश फ्लो पॉज़िटिवः आंतरिक डेटा के मुताबिक कंपनी पहले से फ्री कैश फ्लो पॉज़िटिव है, जिसने पिछले साल ऑपरेशनल कैश फ्लो में 1,200 करोड़ रुपये से अधिक कमाए थे। इस आत्मनिर्भरता के कारण कंपनी पर ‘‘सर्वाईवल फंड’’ जुटाने का दबाव शून्य है।

    •    एडजस्टेड प्रॉफिटेबिलिटीः जहाँ वैधानिक बुक्स में नॉन-कैश, वन-टाईम ई.एस.ओ.पी शुल्क (भारत को इसके ‘रिवर्स फ्लिप’ से मिलने वाला) के कारण नुकसान दिखाई दे रहा है, वहीं कंपनी का एडजस्टेड पी.ए.टी (प्रॉफिट आफ्टर टैक्स) 630 करोड़ रुपये दर्ज हुआ।
    कंपनी को 42 प्रतिशत राजस्व नॉन-पेमेंट सेगमेंट्स, जैसे मर्चैंट सर्विसेज़, इंश्योरेंस, और लेंडिंग से मिलता है, यानी कंपनी यह प्रमाणित कर रही है कि वह अपने 650 मिलियन यूज़र्स से पैसे कमा सकती है।

    फोनपे ने यह निर्णय मांग की कमी के कारण नहीं, बल्कि बाजार में अनुकूल परिस्थितियों का इंतजार करने के लिए लिया है। मौजूदा भूराजनैतिक अस्थिरता के कारण आईपीओ को टालने का फैसला इसलिए लिया गया है कि फोनपे का आईपीओ जब भी जारी हो, तो यह आँकड़ों और विकास की संभावनाओं के साथ आगे बढ़े, न कि भूराजनैतिक दबाव में।

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