'भारत पाक‍िस्‍तान की तरह 'दलाल' देश नहीं', ईरान मध्यस्थता पर विदेश मंत्री जयशंकर की दो टूक

Edited By Updated: 26 Mar, 2026 06:34 AM

india is not a pimp nation like pakistan jaishankar

सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम एशिया में युद्ध जल्द खत्म होना चाहिए, क्योंकि इससे सभी को नुकसान हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि...

नेशनल डेस्कः सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम एशिया में युद्ध जल्द खत्म होना चाहिए, क्योंकि इससे सभी को नुकसान हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि सरकार ने पश्चिम एशिया संघर्ष में कथित मध्यस्थता के संदर्भ में पाकिस्तान को ''दलाल'' राष्ट्र करार दिया।

सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बैठक में कहा कि इस मामले में पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों में कुछ भी नया नहीं है, क्योंकि 1981 से अमेरिका द्वारा उस देश का ''इस्तेमाल'' किया जा रहा है। यह जानकारी मिली है कि जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा के लिए संसद परिसर में बुलाई गई बैठक में उपस्थित नेताओं से कहा, ''हम दलाल राष्ट्र नहीं हैं।'' सूत्रों के अनुसार, सरकार ने विपक्ष के इस आरोप का खंडन किया कि भारत सरकार इस मामले पर चुप है और कहा, ''हम टिप्पणी कर रहे हैं और जवाब भी दे रहे हैं।''

सरकार का पक्ष था कि जब ईरान दूतावास खोला गया, तो विदेश सचिव ने तुरंत वहां दौरा किया और शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने पर जल्द शोक व्यक्त न करके नैतिक कमजोरी दिखाई है। बताया जाता है कि सरकार ने राजनीतिक दलों को यह भी सूचित किया है कि उसकी मुख्य चिंता खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। इस संबंध में सरकार ने कहा कि वह अब तक सफल रही है। पश्चिम एशिया संकट पर सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद विपक्ष ने कहा कि इस मामले से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं था। उन्होंने यह मांग फिर दोहराई कि लोकसभा में नियम 193 और राज्यसभा में नियम 176 के तहत पश्चिम एशिया संकट को लेकर चर्चा होनी चाहिए।

सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने मीडिया से कहा, ''सरकार की ओर से स्पष्टीकरण देने की कोशिश हुई, जो संतोषजनक नहीं है। हम लोगों की मांग है कि लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा होनी चाहिए, उसके बाद लोगों को संतुष्टि होगी।'' उनका कहना था कि बहुत सारे मुद्दे थे, जिन पर सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं था।

उन्होंने यह भी कहा, ''पाकिस्तान जो हमसे हर तरह से कमजोर है, वह मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और हम मूकदर्शक बने हुए हैं।'' समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि लोकसभा में नियम 193 और राज्यसभा में नियम 176 के तहत चर्चा जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की ओर से किए गए बहुत सारे सवालों का जवाब संतोषजनक नहीं था। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार को कहा कि सर्वदलीय बैठक में विपक्ष को पश्चिम एशिया संकट के विषय पर पर्याप्त जानकारी दी गई और विपक्षी नेताओं ने भी विश्वास दिलाया कि संकट की इस घड़ी में वे सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों का समर्थन करेंगे। रीजीजू ने कहा कि आज की बैठक में विस्तृत जानकारी दिए जाने के बाद फिलहाल विपक्ष को और जानकारी मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

संसद भवन परिसर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में सरकार की तरफ से गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू शामिल हुए। विपक्ष की तरफ से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर एवं मुकुल वासनिक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) की नेता सुप्रिया सुले, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, राजद के अभय सिन्हा और कई अन्य नेता शामिल हुए। तृणमूल कांग्रेस इस बैठक में शामिल नहीं हुई। बैठक के बाद माकपा नेता जॉन ब्रिटास ने कहा, "विपक्षी दलों ने सरकार की चुप्पी पर अपनी अस्वीकृति व्यक्त की। सभी विपक्षी नेताओं ने कहा कि सरकार को अमेरिका द्वारा एक संप्रभु स्वतंत्र देश ईरान के खिलाफ एकतरफा हमले के संबंध में एक रुख अपनाना चाहिए था। हमने प्रधानमंत्री की तेल अवीव यात्रा के संबंध में सवाल उठाए हैं, और पाकिस्तान की सक्रिय भूमिका के बारे में भी हमारे कुछ सवाल थे।"

पश्चिम एशिया की स्थिति पर सर्वदलीय बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और टीएमसी सदस्यों की अनुपस्थिति पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह "बेहद गैर-जिम्मेदाराना" व्यवहार है। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी जो बयान दे रहे हैं, उससे गंभीर सवाल उठते हैं कि क्या वह वास्तव में भारत के हितों में रुचि रखते हैं या देश के भीतर अफवाहें फैलाने में रुचि रखते हैं। इससे लोगों के मन में काफी संदेह पैदा हो गया है। आज, एक तरह से, वह पाकिस्तान की सराहना करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। ऐसे समय में जब पाकिस्तान भारत के खिलाफ बयान दे रहा है, वह उन्हें विश्वसनीयता प्रदान करते दिख रहे हैं। उन्हें पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह भारत के साथ खड़े हैं या पाकिस्तान के साथ।" 

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