Edited By Urmila,Updated: 19 Jan, 2026 05:54 PM

राजा साहिब के अस्थान पर आकर मुख्यमंत्री भगवंत मान को माफी मांगनी चाहिए। ये बातें पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने कहीं।
औड़/चक्कदाना/बंगा (छिंजी लड़ोआ) : राजा साहिब के अस्थान पर आकर मुख्यमंत्री भगवंत मान को माफी मांगनी चाहिए। ये बातें पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने कहीं। दरअसल, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पवित्र स्वरूपों के मुद्दे पर नवांशहर के मजारा नौ-आबाद में सुशोभित रस्सोखाना साहिब का जिक्र करते हुए कहा था कि कुछ खोए हुए पवित्र स्वरूप इस जगह पर पड़े हैं। जिसके चलते जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु मुख्यमंत्री के बयान की निंदा कर रहे हैं, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी आज खास तौर पहुंचे।
उन्होंने गुरु घर में माथा टेकने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जब सिखों की सबसे बड़ी संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने यहां पड़े पवित्र स्वरूपों पर कोई एतराज़ नहीं जताया, तो फिर मुख्यमंत्री अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए यह दावा क्यों कर रहे हैं कि इस जगह पर चोरी के स्वरूप पड़े हैं, जबकि प्रबंधकों के पास यहां सजे सभी स्वरूपों का पूरा रिकॉर्ड है और शिरोमणि कमेटी समय-समय पर पवित्र स्वरूपों के सम्मान की जांच भी करती है।
उन्होंने कहा कि यह कोई डेरा नहीं है और न ही यहां कोई साधु बैठता है, बल्कि प्रबंधक कमेटी इस जगह का बड़ा मैनेजमेंट चला रही है, जहां से रोज़ाना हज़ारों संगतें लंगर खाती हैं, इसीलिए राजा साहिब जी ने इस जगह का नाम रसोखाना साहिब रखा था, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे 'रसोई' कहकर इस जगह का और भी अपमान किया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री RSS और केजरीवाल की शह पर लगातार सिख समुदाय को नुकसान पहुंचाने वाली बातें कह रहे हैं, जिन्हें सिख मर्यादा का ज़रा भी पता नहीं है। चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को राजा साहिब आकर माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री अब भी यहां आकर माफी नहीं मांगते हैं तो संगत का गुस्सा और भी भड़क सकता है।
इस मौके पर वरिंदर सिंह ढिल्लों, अंगद सिंह सैनी पूर्व MLA नवांशहर, राणा गुरजीत सिंह पूर्व कैबिनेट मंत्री, कुलवंत सिंह गिल ब्लॉक अध्यक्ष बंगा, रामदास सिंह ब्लॉक अध्यक्ष औड़, डॉ. निरंजन पाल, राम लाभाया पूर्व सरपंच, राजिंदर शर्मा सी. वाइस प्रेसिडेंट, राजिंदर शर्मा, अमरजीत कलसी, राजविंदर सिंह प्रवक्ता, सुखदेव सिंह चेता, डॉ. अमरीक सिंह सोढ़ी, ज्ञान चंद रत्तू, हरबंस बबलू, डॉ. मेहर चंद शर्मा, बलविंदर कौर और किरण बाला मजारा के अलावा कई अन्य सीनियर नेता, कार्यकर्ता और कमेटी सदस्य मौजूद थे।
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