कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, ब्रेंट क्रूड 114 डॉलर के पार, जून 2022 के बाद सबसे महंगा

Edited By Updated: 09 Mar, 2026 10:42 AM

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मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर वैश्विक तेल बाजार पर तेजी से दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है और ब्रेंट क्रूड करीब 24% की बढ़त के साथ 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यह स्तर जून 2022 के बाद का सबसे ऊंचा माना जा रहा...

बिजनेस डेस्कः मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर वैश्विक तेल बाजार पर तेजी से दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है और ब्रेंट क्रूड करीब 24% की बढ़त के साथ 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यह स्तर जून 2022 के बाद का सबसे ऊंचा माना जा रहा है। इस बीच कतर ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध लंबा चला तो कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

क्यों बढ़े तेल के दाम?

तेल की कीमतों में तेजी का एक बड़ा कारण कतर के ऊर्जा मंत्री का बयान माना जा रहा है। उन्होंने कहा है कि यदि क्षेत्र में तनाव जारी रहा तो खाड़ी देश तेल निर्यात सीमित या रोक भी सकते हैं। कतर के ऊर्जा मंत्री ही कतर एनर्जी के प्रेसिडेंट और सीईओ भी हैं।

इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज से तेल सप्लाई पर भी बड़ा असर पड़ा है। पिछले आठ दिनों से इस मार्ग से रोजाना करीब 14 लाख बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। उधर इराक ने तेल उत्पादन करीब 70% तक घटा दिया है, जबकि कुवैत ने भी एहतियात के तौर पर उत्पादन में बड़ी कटौती की है। इन कदमों से वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

महंगाई बढ़ने का खतरा

कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज उछाल से दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि युद्ध खत्म होते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है। उनके मुताबिक वैश्विक शांति के लिए यह “छोटी कीमत” है।

भारत पर क्या होगा असर?

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल महंगा होने से रुपया कमजोर पड़ सकता है, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है और चालू खाते का घाटा भी बढ़ सकता है। अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत की जीडीपी वृद्धि दर में करीब 0.3% से 0.4% तक की कमी आ सकती है।

कीमतें और बढ़ सकती हैं

ग्लोबल ब्रोकरेज गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज का रास्ता जल्द नहीं खुला तो तेल की कीमतें 2008 के रिकॉर्ड स्तर से भी ऊपर जा सकती हैं।

पेट्रोल-डीजल पर क्या असर होगा?

मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत सरकार ने फिलहाल साफ किया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। सरकार के मुताबिक देश में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। 
 

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