Edited By jyoti choudhary,Updated: 09 Mar, 2026 03:33 PM

पश्चिम एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। 9 मार्च को बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। निफ्टी 24,000 के अहम स्तर से नीचे आ गया, जबकि सेंसेक्स करीब 2,300 अंक टूटकर...
बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। 9 मार्च को बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। निफ्टी 24,000 के अहम स्तर से नीचे आ गया, जबकि सेंसेक्स करीब 2,300 अंक टूटकर 76,750 के आसपास कारोबार करता दिखा।
हालांकि कारोबार बंद होने तक बाजार ने कुछ रिकवरी की। सेंसेक्स 1352.74 (1.71%) अंक लुढ़क कर 77,566.16 पर बंद हुआ। निफ्टी में 422.40 (1.73%) अंक गिरावट आई, ये 24,028.05 के स्तर पर बंद हुआ।
गिरावट के 5 बड़े कारण.....
1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
कच्चे तेल का भाव बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह तनाव लंबा खिंचता है तो भारत जैसे तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
2. महंगाई बढ़ने की आशंका
तेल महंगा होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इससे कई देशों के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को टाल सकते हैं, जिससे निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ रही है।
3. वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी गिरावट का माहौल बना हुआ है। एशिया और अमेरिका के कई प्रमुख शेयर बाजार दबाव में हैं। जापान का निक्केई सूचकांक 6% से ज्यादा गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी और अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली।
4. मजबूत अमेरिकी डॉलर और कमजोर रुपया
अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ा है। भारतीय रुपया भी लगभग 92.20 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया है, जिससे बाजार की धारणा प्रभावित हुई है।
5. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FPI) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। मार्च के शुरुआती चार दिनों में ही एफपीआई करीब 21,829 करोड़ रुपए के शेयर बेच चुके हैं, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।