Edited By Tanuja,Updated: 23 Feb, 2026 12:21 PM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अल्टीमेटम के बीच ईरान पर सैन्य हमले की आशंका बढ़ गई है। पूर्व CIA अधिकारी ने सोमवार या मंगलवार से हमले की संभावना जताई। अमेरिका का दावा है कि ईरान एक सप्ताह में बम-ग्रेड यूरेनियम तैयार कर सकता है, जबकि तेहरान...
Washington: मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त अल्टीमेटम दिया है। भारी सैन्य जमावड़े और राजनीतिक दबाव के बावजूद तेहरान के झुकने के संकेत न मिलने से वाशिंगटन में बेचैनी बढ़ गई है।अमेरिका के विशेष दूत Steve Witkoff ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति निराश नहीं हैं, लेकिन यह समझना चाहते हैं कि नौसैनिक और सैन्य दबाव के बावजूद ईरान वार्ता की दिशा में ठोस पहल क्यों नहीं कर रहा। उन्होंने दावा किया कि ईरान संभवतः एक सप्ताह के भीतर बम बनाने योग्य स्तर तक यूरेनियम संवर्धन की स्थिति में पहुंच सकता है।
पूर्व CIA अधिकारी John Kiriakou ने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि भले ही ट्रंप ने 10 दिन की समयसीमा दी हो, लेकिन हमला उससे पहले भी हो सकता है। उनके अनुसार, व्हाइट हाउस में सैन्य तैयारी पूरी कर ली गई है। किरियाकोऊ ने कहा, “ट्रंप अक्सर दुश्मन को असमंजस में रखने के लिए समयसीमा देते हैं, लेकिन अचानक कार्रवाई कर देते हैं।”ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। हालांकि, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने संकेत दिया कि उच्च समृद्ध यूरेनियम का कुछ हिस्सा निर्यात किया जा सकता है संवर्धन की शुद्धता कम की जा सकती है। क्षेत्रीय कंसोर्टियम का गठन संभव है बशर्ते उसके शांतिपूर्ण परमाणु अधिकार को मान्यता मिले और प्रतिबंधों में ठोस राहत दी जाए।
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने उम्मीद जताई है कि इस गुरुवार को Geneva में होने वाली बैठक में कूटनीतिक समाधान निकल सकता है। ईरान में छात्र संगठनों ने फिर से सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। पांच विश्वविद्यालयों के छात्रों ने तेहरान और अन्य शहरों में प्रदर्शन किए। उनका आरोप है कि जनवरी में हुए आंदोलनों को कुचलने के लिए हजारों लोगों की हत्या कराई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक वार्ता विफल रही, तो अमेरिका सीमित हवाई हमले या साइबर ऑपरेशन जैसी रणनीति अपना सकता है।हालांकि, ऐसा कदम पूरे मध्य पूर्व को बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है, जिससे वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा। दुनिया की नजर अब जिनेवा वार्ता पर टिकी है क्या समाधान निकलेगा या युद्ध की आग भड़केगी?