बदल सकता है ऑर्थोपेडिक्स का उपचार, बिना घुटने की रिप्लेसमेंट के होगा उपचार

Edited By Updated: 27 Feb, 2026 10:49 PM

now treatment will be done without knee replacement

मेडिकल इतिहास में पहली बार पंजाब में इतने बड़े पैमाने पर ऑर्थोपेडिक्स कॉन्फ्रेंस का आयोजन व्यापक स्तर पर किया जा रहा है, जिसमें भारत के अलावा इटली, ग्रीस और दूसरे देशों सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर से लगभग 300 डेलीगेट्स एक साथ आ रहे हैं।

लुधियाना   (सहगल) : मेडिकल इतिहास में पहली बार पंजाब में इतने बड़े पैमाने पर ऑर्थोपेडिक्स कॉन्फ्रेंस का आयोजन व्यापक स्तर पर किया जा रहा है, जिसमें भारत के अलावा इटली, ग्रीस और दूसरे देशों सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर से लगभग 300 डेलीगेट्स एक साथ आ रहे हैं। जिसकी थीम “किताबों से आगे ऑर्थोपेडिक्स” है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑर्थोपेडिक्स में उपचार के तरीकों में बदलाव आने की पूरी संभावना है जिसका भरपूर लाभ लोगों को मिलेगा। आज इसके उद्घाटन के बाद शुरुआत हो गई है। कॉन्फ्रेंस का आयोजन एक मार्च तक जारी रहेगा।

कॉन्फ्रेंस पारंपरिक ऑर्थोपेडिक से आगे

कॉन्फ्रेंस डे ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डा. एन.के. अग्रवाल ने बताया कि यह कॉन्फ्रेंस नाखून, प्लेट, हिप इम्प्लांट और पारंपरिक फ्रैक्चर फिक्सेशन के रूटीन ऑर्थोपेडिक्स के बारे में नहीं है, बल्कि इस बात पर फोकस करते हुए कि इनोवेटिव, मिनिमली इनवेसिव और बायोलॉजिकल तकनीकों के ज़रिए मरीज़ों की ज़िंदगी कैसे बदली जाए। पारंपरिक ऑर्थोपेडिक्स से आगे बढ़ना है। 

 नी रिप्लेसमेंट को रोकना – एक नया विज़न

हालांकि भारत में नी रिप्लेसमेंट सर्जरी ने काफ़ी सफलता हासिल की है, यह कॉन्फ्रेंस जिन चीज़ों पर फोकस किया जाएगा, उसमें नी रिप्लेसमेंट को कैसे रोकें, जॉइंट प्रिज़र्वेशन टेक्नीक, रीजेनरेटिव और बायोलॉजिकल थेरेपी आदि शामिल है। कांफ्रेंस का मकसद जब भी मुमकिन हो, मरीज़ों के नेचुरल जॉइंट्स को बदले बिना, उन्हें पूरा काम करने लायक बनाना है।

 फ्रैक्चर ट्रीटमेंट का भविष्य

कॉन्फ्रेंस की एक खास बात (मिनिमली इनवेसिव रिडक्शन एंड ऑस्टियोसिंथेसिस सिस्टम) है। एडवांस्ड फ्रैक्चर मैनेजमेंट सिस्टम, बड़े चीरों से बचाता है, सॉफ्ट टिशू बायोलॉजी को बचाता है, बंद या परक्यूटेनियस तकनीक का इस्तेमाल करता है।

तेज़ी से ठीक होने और रिकवरी को बढ़ावा देता है

इस तकनीक को दुनिया भर में मशहूर ऑर्थोपेडिक एक्सपर्ट डॉ. मारियो टैंगारी दिखा रहे हैं और सिखा रहे हैं, जो खास तौर पर युवा सर्जनों को इस क्रांतिकारी तरीके की ट्रेनिंग देने के लिए भारत आए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि ऐसे बायोलॉजिकल फिक्सेशन सिस्टम देश में फ्रैक्चर केयर का भविष्य दिखाते हैं।

 स्पाइन सर्जरी में आएगी क्रांति

डा. एन.के. अग्रवाल बताते हैं कि आने वाले समय में स्पाइन डिसऑर्डर के लिए, कॉन्फ्रेंस में ये चीज़ें दिखाई जा रही हैं, जिसमें, स्पाइन सर्जरी में एडवांस्ड पेन पोर्टल्स, मिनिमली इनवेसिव एंडोस्कोपिक तकनीकें, ऑर्थोपेडिक्स में ओज़ोन थेरेपी की भूमिका, आधुनिक इंटरवेंशनल पेन मैनेजमेंट स्ट्रेटेजी ये बदलते तरीके दुनिया भर में स्पाइन ट्रीटमेंट को नई परिभाषा दे रहे हैं।

 जाने-माने फैकल्टी और गणमान्य व्यक्ति

कॉन्फ्रेंस में ऑर्थोपेडिक्स के जाने-माने दिग्गज शामिल हो रहे हैं, इनमें,डॉ. एस. एन. तुली, डॉ. राजीव रमन, डॉ. डी.डी. तन्ना, डॉ. मारियो तंगारी जो ऑर्थोपेडिक्स के विश्व स्तरीय विशेषज्ञ हैं, इस विश्व स्तरीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन डॉक्टर एन.के. अग्रवाल, डा. अवतार खरे, डा. रमन सिंगला तथा डॉक्टर दिव्यांशु गुप्ता द्वारा किया जा रहा है।

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