Atishi Video Controversy: सुखपाल खैहरा ने आतिशी पर केस दर्ज और LoP से हटाने की रखी मांग

Edited By Updated: 17 Jan, 2026 04:26 PM

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भुलत्थ से कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने आज दिल्ली विधानसभा के स्पीकर द्वारा 6 जनवरी 2026 को जारी किए गए कार्रवाई के सरकारी बुलेटिन पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

पंजाब / जालंधर: भुलत्थ से कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने आज दिल्ली विधानसभा के स्पीकर द्वारा 6 जनवरी 2026 को जारी किए गए कार्रवाई के सरकारी बुलेटिन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। इस बुलेटिन में साफ तौर से साबित होता है कि आम आदमी पार्टी की नेता प्रतिपक्ष आतिशी मार्लेना ने सदन में मंच पर सिख धर्म के पवित्र गुरुओं के बारे में निंदनीय और गहरे तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां की। खैहरा ने कहा कि स्पीकर के बुलेटिन में साफ दर्ज है कि अध्यक्ष ने फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट प्राप्त की है जो आतिशी द्वारा गुरुओं के खिलाफ की गए अपमानजनक टिप्पणी की पुष्टि करती है। उन्होंने कहा, “यह अब राजनीतिक आरोप या सफाई का मामला नहीं है, यह सरकारी विधानक रिकॉर्डों और फोरेंसिक सबूतों से साबित हो चुका है।”

गहरे दुख का प्रकटावा करते हुए खैहरा ने कहा कि पंजाब भर में और दुनिया भर में सिखों के बीच भारी गुस्से के बावजूद आतिशी ने जनता का सामना करने या माफी मांगने के बजाय अंडरग्राउंड रहना चुना है। उन्होंने कहा कि ''उसकी चुप्पी और गायब होना उसके अपराध को और मजबूत करता है और दिखाता है कि उसके पास कोई नैतिक या तथ्यात्मक बचाव नहीं है।" इन तथ्यों के आधार पर सुखपाल सिंह खैहरा ने कांग्रेस पार्टी की ओर से चार प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में आतिशी मार्लेना के खिलाफ तुरंत मामला दर्ज किया जाए। साथ ही उन्होंने बिना शर्त माफी की मांग करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है।

खैहरा ने यह भी मांग की कि आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल को आतिशी को दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद से तुरंत हटाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने जालंधर में पंजाब पुलिस द्वारा उनके सहित अन्य विपक्षी नेताओं पर दर्ज की गई एफआईआर को झूठी, बदले की भावना से प्रेरित और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए उसे तत्काल रद्द करने की मांग की।

खैहरा ने चेतावनी दी कि धार्मिक भावनाओं का अपमान करने वालों को संरक्षण देना और विरोध की आवाजों को अपराध की श्रेणी में लाना लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी अपने लिए अलग और विपक्ष के लिए अलग कानून नहीं चला सकती। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय अपने गुरुओं का अपमान किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगा और यदि इस मामले में न्याय में देरी या इनकार हुआ तो इससे आक्रोश और असंतोष और बढ़ेगा।

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