Edited By Pardeep,Updated: 25 Feb, 2026 10:13 PM

राजस्थान में निजी बस ऑपरेटरों ने अनिश्चितकालीन ‘चक्का जाम’ शुरू कर दिया है। राजधानी जयपुर समेत कई जिलों में करीब 35 हजार बसें सड़कों से गायब हैं। अनुमान है कि रोजाना सफर करने वाले 15–25 लाख यात्रियों पर इसका सीधा असर पड़ा है।
जयपुर: राजस्थान में निजी बस ऑपरेटरों ने अनिश्चितकालीन ‘चक्का जाम’ शुरू कर दिया है। राजधानी जयपुर समेत कई जिलों में करीब 35 हजार बसें सड़कों से गायब हैं। अनुमान है कि रोजाना सफर करने वाले 15–25 लाख यात्रियों पर इसका सीधा असर पड़ा है।
निजी बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन का कहना है कि परिवहन विभाग की सख्त कार्रवाई—जैसे लगेज कैरियर, परमिट उल्लंघन और ओवरहैंग के नाम पर भारी चालान, यहां तक कि कुछ बसों की आरसी निलंबित करना—उद्योग पर दबाव बढ़ा रहा है। ऑपरेटरों का आरोप है कि रास्ते में बसें सीज करने और यात्रियों को उतारने जैसी कार्रवाई से आम लोगों को दिक्कत हो रही है।
टैक्स रियायत और नियमों पर आपत्ति
संचालक चाहते हैं कि पुराने नियमों को नए मानकों के साथ लागू करने में उन्हें समय दिया जाए। साथ ही वे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर राज्य में टैक्स में राहत की मांग कर रहे हैं।
बस स्टैंड सूने, टिकटें रद्द
जयपुर के सिंधी कैंप, ट्रांसपोर्ट नगर और रेलवे स्टेशन क्षेत्र के बस अड्डों पर सन्नाटा है। 23 से 28 फरवरी तक की ऑनलाइन बुकिंग भी रद्द कर दी गई हैं। यात्रियों को फिलहाल रोडवेज और अन्य विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
किन जिलों में ज्यादा असर?
जयपुर, सीकर, झुंझुनूं और भीलवाड़ा में निजी बसें पूरी तरह बंद बताई जा रही हैं। वहीं जोधपुर जैसे कुछ शहरों में संचालन आंशिक रूप से सामान्य है। मुख्यमंत्री कार्यालय में शासन सचिव अखिल अरोड़ा की अगुवाई में हुई बैठक से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।
सियासत भी तेज
नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने सरकार पर यात्रियों की परेशानियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि त्योहारों और बड़े आयोजनों के समय ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए थी।
वहीं उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि एसोसिएशन से लगातार बातचीत हो रही है। कुछ मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन सरकार के लिए यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और जल्द समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।