मद्रास उच्च न्यायालय ने सिविल न्यायाधीशों के वरिष्ठता निर्धारण के संबंध में निर्देश दिये

Edited By Updated: 24 Jul, 2021 07:35 PM

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चेन्नई, 24 जुलाई (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय का कहना है कि संशोधित वरिष्ठता सूची तमिलनाडु पीएससी या रोस्टर पदों द्वारा दिखाए गए क्रम के बावजूद मान्य रहेगी जोकि सिविल न्यायाधीश (कनिष्ठ डिवीजन) के पद पर भर्ती उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंकों के...

चेन्नई, 24 जुलाई (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय का कहना है कि संशोधित वरिष्ठता सूची तमिलनाडु पीएससी या रोस्टर पदों द्वारा दिखाए गए क्रम के बावजूद मान्य रहेगी जोकि सिविल न्यायाधीश (कनिष्ठ डिवीजन) के पद पर भर्ती उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंकों के अनुसार तैयार की गई है।

मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति की पीठ ने कहा कि यदि दो या अधिक उम्मीदवार समान अंक प्राप्त करते हैं तो इस सूरत में सबसे अधिक उम्र वाले उम्मीदवार को वरिष्ठता सूची में उच्चतम पद दिया जाएगा।

अपने हालिया आदेश में पीठ ने यह साफ किया कि जहां तक 2020 भर्ती प्रक्रिया का सवाल है तो क्योंकि अभी तक नियुक्तियां नहीं की गईं है, ऐसे में इस आदेश और भर्ती परीक्षा में नियुक्त व्यक्तियों द्वारा प्राप्त अंकों के अवरोही क्रम के आधार पर वरिष्ठता सूची तैयार की जाए।
साथ ही पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2009 से पूर्व में हुई न्यायाधीशों की भर्ती के वरिष्ठता निर्धारण से संबंधित नियमों पर इसका कोई असर नहीं होगा।

पीठ एन वासुदेवन और दो अन्य की रिट याचिकाओं का निपटारा कर रही थी जिन्होंने रजिस्ट्रार जनरल के 10 मार्च 2009 के उस आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया था जिसमें याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता का गलत निर्धारण किया था।



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