Edited By Anu Malhotra,Updated: 25 Jun, 2026 01:29 PM

राजधानी दिल्ली की सड़क व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठक में 270.63 किलोमीटर लंबी सड़कों के सुदृढ़ीकरण के लिए करीब 658 करोड़ रुपये की...
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की सड़क व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठक में 270.63 किलोमीटर लंबी सड़कों के सुदृढ़ीकरण के लिए करीब 658 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है।
सरकार का कहना है कि इस योजना के तहत दिल्ली की प्रमुख सड़कों को अधिक मजबूत, सुरक्षित और लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जाएगा। इससे लोगों को बेहतर यातायात सुविधाएं मिलेंगी और सड़कों की गुणवत्ता में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। परियोजना के तहत लोक निर्माण विभाग (PWD) के विभिन्न जोनों में सड़क सुधार कार्य किए जाएंगे। पूर्वी क्षेत्र की सड़कों पर लगभग 147 करोड़ रुपये, उत्तरी क्षेत्र में 247 करोड़ रुपये और दक्षिणी क्षेत्र में करीब 264 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
सड़कों के पुनर्निर्माण और मजबूती के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसमें पुरानी सड़क की खराब परत हटाने के लिए कोल्ड मिलिंग, सड़क को मजबूत आधार देने के लिए डेंस बिटुमिनस मैकाडम तथा ऊपरी सतह को बेहतर और टिकाऊ बनाने के लिए बिटुमिनस कंक्रीट का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके अलावा नई और पुरानी सड़क की परतों के बीच बेहतर पकड़ सुनिश्चित करने के लिए टैक कोट लगाया जाएगा। सड़कों पर नई लेन मार्किंग, ज़ेब्रा क्रॉसिंग, दिशा संकेतक, रिफ्लेक्टर, सुरक्षा बैरियर और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। बारिश के पानी की निकासी के लिए कर्ब और ड्रेनेज व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।
दिल्ली सरकार पहली बार पारंपरिक सड़क-आधारित टेंडर प्रणाली की जगह जोनवार कॉम्पोजिट टेंडर मॉडल लागू कर रही है। इस व्यवस्था से आधुनिक मशीनों और संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी आसान होगी और निर्माण के बाद रखरखाव की जिम्मेदारी भी स्पष्ट रूप से तय की जा सकेगी।
परियोजना की खास बात यह है कि सभी निर्माण कार्यों के लिए पांच वर्ष की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि निर्धारित की गई है। इसका मतलब है कि निर्धारित समय के भीतर सड़क में किसी भी प्रकार की तकनीकी कमी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी को उसकी जिम्मेदारी उठानी होगी।
सरकार ने निर्माण कार्यों के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पालन करने पर भी जोर दिया है। सभी टेंडर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के दिशा-निर्देशों के अनुसार तैयार किए जाएंगे ताकि धूल प्रदूषण को कम किया जा सके और राजधानी की वायु गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके। सरकार का मानना है कि बेहतर और आधुनिक सड़कें न केवल आवागमन को आसान बनाएंगी, बल्कि सड़क सुरक्षा बढ़ाने, ट्रैफिक प्रबंधन सुधारने और प्रदूषण कम करने में भी अहम कदम है।