‘राजनीति में अपराधियों का बोलबाला’ असम और पुड्डुचेरी उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले!

Edited By Updated: 02 Apr, 2026 05:40 AM

criminals dominate politics

देश की संसद और राज्यों की विधानसभाएं देश और विदेश से संबंधित गंभीर विषयों पर चर्चा करने के मंच हैं लेकिन अब लोकसभा और विधानसभाओं में ऐसे सदस्य चुन कर पहुंच रहे हैं जिनकी अपनी पृष्ठभूमि आपराधिक है।

देश की संसद और राज्यों की विधानसभाएं देश और विदेश से संबंधित गंभीर विषयों पर चर्चा करने के मंच हैं लेकिन अब लोकसभा और विधानसभाओं में ऐसे सदस्य चुन कर पहुंच रहे हैं जिनकी अपनी पृष्ठभूमि आपराधिक है। 2009 में संसद में पहुंचे 30 प्रतिशत लोकसभा सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले थे जबकि 2014 में यह संख्या बढ़कर 34 प्रतिशत हो गई और 2019 में यह आंकड़ा 43 प्रतिशत पर पहुंच गया और 2024 के चुनाव में यह संख्या बढ़कर 46 प्रतिशत हो गई है। एसोसिएशन आफ डैमोक्रेटिक रिफार्म (ए.डी.आर.) की जून, 2024 की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा लोकसभा के 543 सांसदों में से 251 (46 प्रतिशत)  के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 27 सांसद ऐसे हैं जिन्हें किसी न किसी मामले में सजा भी हो चुकी है।

इसी प्रकार ए.डी.आर. की अक्तूबर, 2025 की रिपोर्ट के अनुसार देश की सभी विधानसभाओं के कुल 4131 विधायकों में से 1861 विधायकों (45 प्रतिशत) के खिलाफ आपराधिक मामले हैं, जिनमें से 1205 के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
9 अप्रैल से लेकर 4 मई के मध्य तमिलनाडु, केरल, असम, पुड्डुचेरी और पश्चिम बंगाल में विधानसभाओं के चुनाव हो रहे हैं। 2021 में इन राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में कुल 822 विधायक चुने गए थे और इनमें से 419 (52 प्रतिशत) विधायकों ने चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामों में अपने खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने की बात कबूल की थी। असम के विधानसभा चुनावों से पहले ए.डी.आर. ने चुनाव मैदान में उतरे 722 उम्मीदवारों के हलफनामों का अध्ययन किया है। इस अध्ययन के अनुसार 102 (14 प्रतिशत) उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की बात कबूल की है। इनमें से 82 (11 प्रतिशत) उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

असम में कांग्रेस के 99 उम्मीदवारों में से 28, भाजपा के 90 में से 8, आल इंडिया यूनाइटिड डैमोक्रेटिक फ्रंट के 30 में से 11, असम गण परिषद् के 26 में से 6, राइजोर दल के 13 में से 2, असम जातीय परिषद् के 10 में से 2 तथा सी.पी.आई. माक्र्सवादी के 3 में से 1 उम्मीदवार ने अपने खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने की पुष्टि की है। इसी प्रकार पड्डुचेरी के 291 उम्मीदवारों में से 66 (23 प्रतिशत) उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने का खुलासा हुआ है। इनमें से 38 उम्मीदवारों (13 प्रतिशत) के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। अपराधियों को लोकसभा और विधानसभाओं में जाने से रोकने के लिए चुनाव आयोग के पास पर्याप्त कानूनी शक्तियां नहीं हैं। चुनाव आयोग ने हर उम्मीदवार के लिए नामांकन के समय अपने खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों की जानकारी शपथपत्र में देना अनिवार्य किया है। साथ ही उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को इन जानकारियों को अखबारों, टी.वी. और डिजिटल माध्यमों पर सार्वजनिक करना होता है, ताकि मतदाता उचित निर्णय ले सकें।

राजनीतिक दल जब उम्मीदवारों को टिकट देते हैं तो वह न सिर्फ उम्मीदवार की आॢथक स्थिति देखते हैं बल्कि यह भी देखा जाता है कि उम्मीदवार की चुनाव जीतने की क्षमता कितनी है। कई उम्मीदवार अपने धन बल और कई उम्मीदवार अपने बाहुबल के चलते संसद और विधानसभाओं में पहुंच जाते हैं। कानून के अनुसार सांसद या विधायक तभी अयोग्य ठहराया जाता है जब उसे किसी मामले में 2 वर्ष से ज्यादा सजा हो जाए। जनता जानकारी के अभाव में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान कर देती है।  राजनीति से आपराधिक तत्वों को दूर रखने के लिए नेताओं से जुड़े आपराधिक मामलों में तेजी से सुनवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही राजनीतिक दलों को भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट नहीं देनी चाहिए क्योंकि इससे राजनीतिक दलों की जनता में छवि खराब होती है।—विजय कुमार

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