पंजाब सरकार गैर कानूनी दबावों का इस्तेमाल न करे

Edited By Updated: 16 Jan, 2026 04:40 AM

the punjab government should not use illegal pressure tactics

प्रैस की स्वतंत्रता का इतिहास देश में शुरुआत से रहा है लेकिन उसकी स्वतंत्रता को खंडित करने की कोशिशें भी समय-समय पर होती रही हैं। यह भी सच है कि आजादी के बाद से जब से ‘पंजाब केसरी’ समूह अस्तित्व में आया है तब से वह प्रैस की स्वतंत्रता और निष्पक्षता...

प्रैस की स्वतंत्रता का इतिहास देश में शुरुआत से रहा है लेकिन उसकी स्वतंत्रता को खंडित करने की कोशिशें भी समय-समय पर होती रही हैं। यह भी सच है कि आजादी के बाद से जब से ‘पंजाब केसरी’ समूह अस्तित्व में आया है तब से वह प्रैस की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के लिए लगातार काम कर रहा है, चाहे बड़े से बड़े मामले हों। आपातकाल के दौरान भी ‘पंजाब केसरी’ समूह जनता की बात कहता रहा है और आतंकवाद के दौरान तो सीना तान कर हम खड़े रहे। आतंकियों के खिलाफ हमने खबरें छापीं और जो पीड़ित थे उनके समर्थन में हमने आवाज उठाई। 

हम उससे भी आगे बढ़े और हमने बाकायदा पीड़ितों के लिए, चाहे वे जम्मू-कश्मीर के पीड़ित थे या फिर पंजाब के आतंकवाद पीड़ित, यथासंभव आॢथक सहायता दी और राहत सामग्री भिजवाई। यह सिलसिला आज भी जारी है। दूसरी ओर, जब वर्ष 1974 में पंजाब राज्य विद्युत बोर्ड ने तत्कालीन ज्ञानी जैल सिंह की सरकार के कहने पर ‘पंजाब केसरी’ समूह की बिजली काट दी तो हमने ट्रैक्टर से मशीन चलाकर अखबार छापा जो अपने आप में अनूठा प्रयोग था। और तब 10 दिन के भीतर ही माननीय हाईकोर्ट ने बिजली आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए थे। इस घटना को दुनियाभर में सराहा गया। आतंकवाद के दौरान मेरे पिता और भाई समेत 62 कर्मचारियों और एजैंटों की आतंकियों ने हत्या की, तब भी हम नहीं झुके और हम सीना तान कर पत्रकारिता करते रहे। 

अब फिर एक बार ‘पंजाब केसरी’ समूह निशाने पर है। हुआ यह कि पिछले साल 31 अक्तूबर को एक संतुलित और निष्पक्ष रिपोर्ट छापी गई, जिसमें विपक्ष ने पंजाब में सत्तारूढ़ दल के राष्ट्रीय संयोजक पर कुछ आरोप लगाए थे। इसमें ऐसा कुछ नया नहीं था लेकिन एक दिन बाद ही पंजाब सरकार ने ‘पंजाब केसरी’ समूह के सर्वाधिक प्रसारित हिन्दी और पंजाबी अखबारों में विज्ञापन बंद कर दिए। यह भी तब हुआ जब उस खबर के बाद हमने सत्तारूढ़ दल का भी पक्ष पूरा छापा। लेकिन आर्थिक रूप से नुकसान के बावजूद हम अपनी निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारिता करते रहे। परंतु अब ऐसा लगता है कि सरकार ने ‘पंजाब केसरी’ और उसके प्रवर्तकों के खिलाफ एक अभियान सा छेड़ दिया है। हमारे समूहों पर सरकारी विभागों ने बेतरतीब तरीके से अनेक छापे मारे। इसी हफ्ते हमारी लुधियाना प्रैस, जालंधर प्रैस और बङ्क्षठडा प्रैस में भी छापों की वारदात को अंजाम दिया गया। 

सरकार के जितने भी विभाग हो सकते थे सबका इस्तेमाल हमारी कंपनियों पर छापे के लिए किया गया। चाहे वह फैक्ट्री विभाग हो या फिर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड। बिजली विभाग ने तो बिना नोटिस दिए हमारे एक संस्थान की बिजली ही काट दी। ऐसी स्थिति में पंजाब के हमारे तमाम संस्थानों को रोकने की कोशिश की जा रही है। हमारे प्रैस केंद्रों, छपाई केंद्रों के बाहर तमाम शहरों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। तय है यह सब जानबूझ कर किया जा रहा है और अखबार को भारी दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है। इस बारे में हमने मुख्यमंत्री सरदार भगवंत मान और राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को भी मजबूर होकर पत्र लिखे हैं। हमारा मानना है कि इस तरीके की गतिविधियां न केवल अलोकतांत्रिक हैं, बल्कि दमनकारी भी हैं और प्रैस की स्वतंत्रता से कोसों दूर भी हैं। हमारा मुख्यमंत्री और राज्यपाल महानुभावों से आग्रह है कि वे इस तरह की अलोकतांत्रिक कार्रवाइयां बंद कराएं और प्रैस की स्वतंत्रता अक्षुण्ण बनाए रखने में सहयोग दें। हम यह स्पष्ट कर दें कि ‘पंजाब केसरी’ समूह प्रैस की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के लिए हमेशा आगे रहेगा। हमारा लोकतंत्र के सभी प्रहरियों से आग्रह है कि वे पत्रकारिता की लड़ाई में हमारे साथ खुलकर सामने आएं।—विजय चोपड़ा

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