‘बे लगाम’ ई-रिक्शाओं का देश भर में आतंक

Edited By Updated: 11 May, 2023 04:59 AM

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पर्यावरण को बचाने की दृष्टि से दुनिया भर में वैकल्पिक ईंधन के कई स्रोतों में से एक है इलैक्ट्रॉनिक वाहन।

पर्यावरण को बचाने की दृष्टि से दुनिया भर में वैकल्पिक ईंधन के कई स्रोतों में से एक है इलैक्ट्रॉनिक वाहन। आजकल इन ई-वाहनों की संख्या काफी बढ़ रही है और कई नामी कम्पनियां भी इस दौड़ में आ चुकी हैं। इसी शृंखला में देश भर में ई-रिक्शाओं का चलन भी काफी तेजी से हो रहा है। जहां एक ओर ये ई-रिक्शा पर्यावरण को बचाने का काम कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर इनका आतंक भी काफी बढ़ रहा है। देश भर के कई शहरों में अवैध रूप से चलने वाले ई-रिक्शा यातायात व्यवस्था के लिए एक अभिशाप बने हुए हैं।

आज आप देश के किसी भी शहर में चले जाएं वहां आपको बेलगाम दौड़ रही ई-रिक्शा के चलते अव्यवस्था के साथ ट्रैफिक जाम जैसी बड़ी परेशानी को झेलना पड़ता है। इसके मुख्य कारणों में से कुछ कारण ऐसे हैं जो किसी भी शहर में आप देख सकते हैं। अपने हिसाब से रूट बनाकर दौड़ रहे ये ई-रिक्शा चालक शहर की गलियों तक में जाम को बड़ा रूप दे देते हैं। इसके अलावा बाजारों में मनमाने ढंग से रिक्शाओं को रोक कर खड़े रहना, एक ही रूट पर अधिक यात्रियों के लालच में काफी देर तक सड़कों पर खड़े रहना और जाम लगाना।

गलत लेन में रिक्शाओं को चला कर अन्य वाहनों को न निकलने देना। ये कुछ ऐसे कारण हैं जो शहरों में जाम की बड़ी परेशानी की वजह बने हुए हैं। ई-रिक्शाओं पर यातायात पुलिस की लगाम भी ढीली है, जिस कारण अवैध ई-रिक्शाओं की दौड़ भी बढ़ती जा रही है। यदि किसी शहर में यदि एक हजार ई-रिक्शाओं का पंजीकरण निर्धारित किया जाता है तो आपको सड़कों पर उससे कई गुना ज्यादा तादाद में ई-रिक्शाओं का जाल नजर आ जाएगा। परंतु ट्रैफिक विभाग या नगर निगम के अधिकारियों को ये अवैध ई-रिक्शा नजर नहीं आएंगे।

यदि कभी इन पर सख्ती की भी जाती है तो वह केवल औपचारिकता के सिवाय कुछ नहीं होती। दिल्ली जैसे महानगर को ही लें तो यहां की किसी भी प्रमुख सड़क पर, जहां ई-रिक्शाओं को चलाए जाने की अनुमति दी गई है, आपको जाम के नजारे दिखाई देंगे। मैट्रो स्टेशन हो या कोई भी प्रमुख बाजार, ई-रिक्शाओं का आतंक किसी माफिया से कम नहीं है। दिल्ली की मुख्य मेन रोड पर प्राय: ये ई-रिक्शा वाले 2 से 3 लेन को ब्लॉक कर देते हैं और मजबूरन बसों व अन्य भारी वाहनों को भी अपनी निर्धारित लेन बदल कर सड़क के बीचों-बीच चलना पड़ता है।

नतीजतन जाम की स्थिति बन जाती है। इस जाम के चलते प्रदूषण भी बढ़ जाता है। फिर वो चाहे अन्य वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण वायु प्रदूषण हो या ध्वनि प्रदूषण, दोनों ही तकलीफ देते हैं। तो जिस पर्यावरण को बचाने की मंशा से ई-रिक्शाओं का चलन शुरू हुआ था वह उद्देश्य तो पूरा होता नहीं दिखाई देता। ज्यादातर ई-रिक्शा आपको मैट्रो स्टेशन व बस स्टॉप पर दिखाई देंगे। सवारियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए ई-रिक्शाएं व ऑटो सहायक पाए जाते हैं।

यदि ये ई-रिक्शा व ऑटो अनियंत्रित रूप से चलने लगेंगे और अपनी मनमानी करेंगे तो जनता को फायदा नहीं नुक्सान ही होगा। प्राय: यह देखा गया है कि ज्यादातर ई-रिक्शा सवारियों की खोज में बस स्टॉप को घेर कर खड़े रहते हैं। इस कारण बसों को उनके निर्धारित स्टॉप पर रुकने की जगह नहीं मिलती है। यदि किसी बस में से उस स्टॉप पर कोई उतरने वाली सवारी नहीं होती तो बस चालक अपनी बस को उस स्टॉप पर नहीं रोकता। परंतु उस बस स्टॉप से यदि कोई चढऩे वाली सवारी होती है और यदि वो बस स्टॉप के अंदर प्रतीक्षा कर रही हो तो वो ई-रिक्शाओं के खड़े होने के कारण बस ड्राइवर को दिखाई नहीं देती।

इसलिए जहां-जहां ये ई-रिक्शा बस स्टॉप को अवैध रूप से घेर कर खड़े रहते हैं वहां-वहां सवारियों को मजबूरन सड़क पर खड़ा होना पड़ता है। ऐसे में दुर्घटना और छीना-झपटी होने का खतरा भी बढ़ जाता है। परंतु कोई भी अधिकारी, चाहे पुलिस विभाग का हो या नगर निगम का, कोई कार्रवाई नहीं करता। कारण स्पष्ट है, ई-रिक्शाओं का जाल चलाने वाले गैंग हर विभाग के अधिकारियों को ‘खुश’ रखते हैं। देश भर में जिन-जिन शहरों में ऐसे मार्ग या प्रमुख सड़कें हैं, जहां ये ई-रिक्शा जाम का कारण बनते हैं, वहां पुलिस प्रशासन व नगर निगम को सख्ती से पेश आना चाहिए।

यदि वहां पर अवैध रूप से ई-रिक्शा चल रहे हैं तो इनको जब्त किया जाना चाहिए। यदि कोई भी ई-रिक्शा चालक गलत लेन में खड़ा है तो उसका चालान काटना चाहिए। ऐसा नहीं है कि पुलिस अधिकारी यातायात को नियंत्रित नहीं कर सकते। यदि किसी भी इलाके में किसी वी.आई.पी. का जाना तय होता है तो वहां पर यातायात पूरी तरह से व्यवस्थित और नियंत्रित रहता है। यह वही मार्ग होते हैं जहां सामान्य दिनों में आपको भारी जाम का सामना करना पड़ता है। -रजनीश कपूर

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