Edited By ,Updated: 23 Jan, 2026 05:33 AM

पंजाब सरकार द्वारा ‘हिंद समाचार समूह’ के प्रकाशनों - ‘पंजाब केसरी’ और ‘जग बाणी’ दैनिक समाचार पत्रों पर की गई कार्रवाई की खबर वर्तमान में पंजाब और उसके बाहर जनता का ध्यान आकॢषत कर रही है। और ऐसा होना सही भी है, क्योंकि ये समाचार पत्र दशकों से इस...
पंजाब सरकार द्वारा ‘हिंद समाचार समूह’ के प्रकाशनों - ‘पंजाब केसरी’ और ‘जग बाणी’ दैनिक समाचार पत्रों पर की गई कार्रवाई की खबर वर्तमान में पंजाब और उसके बाहर जनता का ध्यान आकॢषत कर रही है। और ऐसा होना सही भी है, क्योंकि ये समाचार पत्र दशकों से इस क्षेत्र में जनता के लिए सूचना और समाचारों के मुख्य आधार बन गए हैं। मैं स्वयं एक ओर स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया का पक्षधर हूं, तो दूसरी ओर मीडिया अंगों के निर्बाध कामकाज का समर्थन करता हूं।
जाहिर है, अधिकारियों और राजनीतिक शक्तियों द्वारा तुच्छ प्रक्रियात्मक और प्रशासनिक आधारों पर मीडिया पर की गई कोई भी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। मुझे विश्वास है कि मीडिया और सरकार के बीच का यह गतिरोध जल्द से जल्द समाप्त हो जाएगा, क्योंकि मामला पहले से ही अदालत में है। जालंधर के ‘हिंद समाचार समूह’ और अन्य मीडिया घरानों, जैसे- वीर प्रताप, मिलाप, अजीत, नवां जमाना ने न केवल पंजाब, बल्कि पूरे उत्तर भारत में काफी प्रतिष्ठा हासिल की है। 1970 के दशक की शुरुआत में भारतीय विदेश सेवा (आई.एफ.एस.) में शामिल होने के लिए दिल्ली जाने से पहले, मैंने जालंधर में अपने शुरुआती वर्षों में लाला जगत नारायण, रमेश चंद्र, अश्विनी चोपड़ा और वर्तमान में विजय चोपड़ा, अविनाश चोपड़ा और अमित चोपड़ा की प्रसिद्ध वंशावली के ‘हिंद समाचार’, ‘पंजाब केसरी’ और ‘जग बाणी’ को पढ़ कर समाचारों और सूचनाओं की अपनी भूख मिटाई है।
आज भी ‘पंजाब केसरी’ (हिंदी) और ‘जग बाणी’ (पंजाबी) पंजाब और उससे बाहर एक घरेलू नाम है। स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है जिसे ‘चौथा स्तंभ’ कहा जाता है। मैं आने वाले वर्षों के लिए ‘हिंद समाचार समूह’ को अपनी शुभकामनाएं देता हूं।
मेरी सदा को दबाना तो खैर मुमकिन है, मगर नई अवाम की आवाज कौन रोकेगा।(लेखक एक सेवानिवृत्त करियर राजनयिक हैं/साभार ‘द एशियन इंडिपैंडैंट’, यू.के.)-रमेश चंदर