Edited By ,Updated: 10 Oct, 2026 03:55 AM

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर विपक्षी सांसदों के मार्च के दौरान पुलिस बैरिकेड पर सहजता से चढ़कर अपनी एथलैटिक क्षमता का प्रदर्शन किया और सभी का ध्यान आकॢषत किया। अपनी ट्रेडमार्क सफेद कॉलर वाली टी-शर्ट पहने राहुल...
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर विपक्षी सांसदों के मार्च के दौरान पुलिस बैरिकेड पर सहजता से चढ़कर अपनी एथलैटिक क्षमता का प्रदर्शन किया और सभी का ध्यान आकॢषत किया। अपनी ट्रेडमार्क सफेद कॉलर वाली टी-शर्ट पहने राहुल बैरिकेड पर खड़े हो गए और दिल्ली पुलिस के सामने तिरंगा लहराया। उनके पीछे खड़े सैंकड़ों कांग्रेस कार्यकत्र्ता ‘ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो, प्रधानमंत्री इस्तीफा दो’ के नारे लगा रहे थे।
इस बीच, कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) में कथित अनियमितताओं को लेकर इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा। गांधी ने कहा कि संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन सड़कों पर उतरना, गिरफ्तारियां देना और कानूनी मुकद्दमों का सामना करना जारी रखेंगे।
कांग्रेस-सपा में सीट-बंटवारे को लेकर घमासान : 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले, कांग्रेस समाजवादी पार्टी पर सीटों के बड़े हिस्से के लिए अत्यधिक दबाव बनाने के उद्देश्य से छोटे विपक्षी दलों को अपने साथ जोडऩे की तैयारी में जुट गई है। अपनी जनता पार्टी के स्वामी प्रसाद मौर्य, अन्य पिछड़ा वर्ग ओ.बी.सी. चौहान समाज का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी के प्रमुख संजय चौहान और अपना दल (कैमरावादी) के नेता पंकज निरंजन ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी, जिससे उनके जल्द ही कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने की तीव्र अटकलों को हवा मिली है। ये बैठकें ऐसे समय में हुई हैं, जब उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सपा के साथ सीट-बंटवारे में ‘समान सम्मान और समान हिस्सेदारी’ की मांग की थी। कांग्रेस के लिए, जिसके पास केवल 2 विधायक हैं लेकिन 2024 में उसने 6 लोकसभा सीटें जीती थीं, यह बातचीत उस राज्य में खुद को फिर से मजबूत करने के लिए पर्याप्त स्थान हासिल करने के बारे में भी है, जहां कभी उसका वर्चस्व था।
सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव कांग्रेस को 60 से ज्यादा सीटें देने के पक्ष में नहीं थे लेकिन कांग्रेस 100 से ज्यादा सीटों की मांग कर रही है। अब अखिलेश यादव के सामने कांग्रेस के साथ सीट-बंटवारे पर सहमति बनाने और एक न्यूनतम सांझा कार्यक्रम पर सहमत होने की कड़ी चुनौती है। जहां तक सीट-बंटवारे का सवाल है, अंतिम फैसला अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच सीधी बातचीत के जरिए होगा। यद्यपि सीटों की संख्या को लेकर कुछ मोल-भाव होना तय है, फिर भी दोनों दलों के नेता इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि परस्पर स्वीकार्य समाधान निकल आएगा।
योगी का ‘80 बनाम20’ : उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां काफी तेज हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अपने विवादास्पद ‘80 बनाम 20’ के मुद्दे को फिर से उठा दिया है। उन्होंने 10 राज्यसभा सीटों के लिए समाजवादी पार्टी के 2 उम्मीदवारों के मुकाबले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा 8 उम्मीदवार उतारे जाने का हवाला देते हुए इसे इस बात का सबूत बताया कि 80 प्रतिशत मतदाता सत्तारूढ़ गठबंधन का समर्थन करते हैं, जिससे विपक्ष के लिए केवल 20 प्रतिशत ही बचते हैं। जबकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी का जवाब दिया और फिर एक्स पर लिखा, ‘‘सच तो यह है कि 2024 के चुनाव में हार के कारण संतुलन बिगड़ गया है, इसीलिए ऐसे असंतुलित बयान आ रहे हैं। 5 सैकेंड के कबूलनामे में पी.डी.ए. को धमकाने से भाजपा न केवल 5 दशकों या 5 सदियों तक, बल्कि अपने 5 जन्मों तक भी सिर उठाकर आंखों में आंखें डालकर देखने की स्थिति में नहीं रहेगी।’’
सपा प्रमुख ने जून 2023 में पहली बार संक्षिप्त नाम पी.डी.ए. (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का इस्तेमाल किया था। इस सूत्र को भाजपा के नेतृत्व वाले एन.डी.ए. के खिलाफ सपा के सामाजिक गठबंधन के रूप में रेखांकित किया गया था, जिसमें अखिलेश बार-बार यह दावा करते रहे हैं कि ‘पी.डी.ए. ही एन.डी.ए. को हराएगा।’ इस बीच, अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से आगामी विधानसभा चुनाव लडऩे की चुनौती दी और यह भी कहा कि वह जल्द ही पार्टी नेताओं के साथ दर्शन के लिए राम मंदिर जाएंगे। अखिलेश सपा नेता और पार्टी के अयोध्या उम्मीदवार तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में एक सभा को संबोधित कर रहे थे।
शिवसेना (यू.बी.टी.) द्वारा समर्थन व सवाल भी उठाया : शिवसेना (यू.बी.टी.) ने आम आदमी पार्टी (आप) और द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (द्रमुक) से आग्रह किया कि वे कांग्रेस के साथ अपने मतभेदों को दरकिनार करें और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के अभियान में शामिल हों। हालांकि, द्रमुक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राहुल गांधी के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक के विरोध का समर्थन किया, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाया कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) के तहत तमिलनाडु में हटाए गए नामों पर कांग्रेस नेता चुप क्यों हैं।
द्रमुक नेता टी.के.एस. एलंगोवन ने बुधवार को दिल्ली में एस.आई.आर.-सी.ई.सी. मुद्दे पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के विरोध प्रदर्शन का बचाव करते हुए कहा कि सरकार उनका विरोध करना पसंद नहीं करती क्योंकि वह देश को कानून के अनुसार चलाने की बजाय अपनी इच्छा के अनुसार चलाना चाहती है। इस प्रत्यक्ष विरोधाभास को आंशिक रूप से तमिलनाडु के अप्रैल चुनाव के बाद के राजनीतिक पुनर्गठन द्वारा समझा जा सकता है। द्रमुक ने इसके बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक को छोड़ दिया। टी.वी.के. अब कांग्रेस और अन्य छोटे दलों के समर्थन से शासन करती है।-राहिल नोरा चोपड़ा