द्रमुक-कांग्रेस में अनबन का नियंत्रण कांग्रेस हाईकमान ने लिया

Edited By Updated: 21 Feb, 2026 04:03 AM

the congress high command took control of the dmk congress rift

तमिलनाडु  में द्रविड़ मुनेत्र कझगम-कांग्रेस गठबंधन के अंदर चल रही अनबन पर कांग्रेस हाईकमान ने पूरी तरह से सीधा कंट्रोल कर लिया है। हालांकि 22 फरवरी से फॉर्मल बातचीत शुरू होने वाली है लेकिन कांग्रेस नेताओं के सार्वजनिक बयानों से पहले ही इस बात पर बहस...

तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कझगम-कांग्रेस गठबंधन के अंदर चल रही अनबन पर कांग्रेस हाईकमान ने पूरी तरह से सीधा कंट्रोल कर लिया है। हालांकि 22 फरवरी से फॉर्मल बातचीत शुरू होने वाली है लेकिन कांग्रेस नेताओं के सार्वजनिक बयानों से पहले ही इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि यह अनबन असली है या सोची-समझी मोलभाव की रणनीति। इसकी शुरुआती चिंगारी कांग्रेस की सीटों के बड़े हिस्से और गठबंधन के सत्ता में लौटने पर शासन में ज्यादा तय भूमिका की मांग लगती है। 

सांसद मणिकम टैगोर और रणनीतिकार प्रवीण चक्रवर्ती जैसे कांग्रेस नेताओं के मुखर बयानों से यह मुद्दा और बढ़ गया है, जिन्होंने एक्टर-पॉलिटिशियन विजय की पार्टी, तमिलगा वेत्री कझगम के साथ जुडऩे की संभावना सहित दूसरे पॉलिटिकल अलायंस के बारे में सार्वजनिक रूप से इशारा किया है। लेकिन हाल ही में, सीनियर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने कनिमोझी के जरिए द्रमुक नेतृत्व को साफ-साफ बता दिया है कि उनकी पार्टी ऐसी किसी भी रणनीति पर जोर नहीं देगी जिससे गठबंधन में तनाव पैदा हो, जिसमें पावर-शेयरिंग पर बातचीत भी शामिल है। 

कहा जा रहा है कि उन्होंने चुनाव से पहले कोई दूसरा गठबंधन चुनने या विजय की तमिलगा वेत्री कझगम (टी.वी.के.) के साथ जाने के किसी भी ऑप्शन से मना कर दिया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि द्रमुक ने एक इनडायरैक्ट अल्टीमेटम दिया है कि कांग्रेस गठबंधन में रह सकती है लेकिन सरकार में हिस्सेदारी के बिना और अगर इससे पावर-शेयरिंग पर कोई जोर पड़ता है, तो वह छोडऩे के लिए आजाद हैं। ऐसे भी सुझाव हैं कि द्रमुक ने गठबंधन को आसानी से जारी रखने के लिए प्रवीण चक्रवर्ती और मणिकम टैगोर जैसे नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। बयानबाजी के बावजूद, दोनों पार्टियां भाजपा विरोधी एकता को एक जोडऩे वाली ताकत के तौर पर जोर दे रही हैं। 

कर्नाटक में नहीं थम रही सत्ता के लिए खींचतान : कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस के अंदर सत्ता की खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही, ऐसे में उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि लीडरशिप में बदलाव का फैसला पहले ही हो चुका है और चीफ मिनिस्टर सिद्धारमैया सही समय पर इसकी घोषणा करेंगे। शिवकुमार ने सोशल वैल्फेयर मिनिस्टर डा. एच.सी. महादेवप्पा के बयान पर प्रतिक्रिया दी थी, जिन्होंने कहा था कि कर्नाटक में पावर-शेयरिंग पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में नेतृत्व मजबूत हैं और इसमें बदलाव की संभावना से इंकार किया। हालांकि, शिवकुमार ने कहा कि वह महादेवप्पा या दूसरे नेताओं पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे। 

इस बीच, चीफ मिनिस्टर सिद्धारमैया के वफादार कहे जाने वाले 22 कांग्रेसी विधायक अपने खर्चे पर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के प्राइवेट टूर पर जाने के लिए एक साथ आए हैं, जबकि विधायकों का दूसरा बैच भी उनके साथ जाने के लिए तैयार है। इस कदम को बड़े पैमाने पर सिद्धारमैया की यह संकेत देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है कि उनके पास कांग्रेस विधायकों के बहुमत का सपोर्ट है। शिवकुमार ‘टॉप पोस्ट’ के लिए फोकस में बने रहना चाहते हैं, जबकि कांग्रेस हाईकमान ने केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और पुड्डुचेरी में आने वाले असैंबली इलैक्शन खत्म होने तक वेट एंड वॉच अप्रोच का संकेत दिया है। 

प्रियंका गांधी का असम दौरा : असम असैंबली इलैक्शन से पहले, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुवाहाटी में भाजपा की अगुवाई वाली राज्य सरकार के खिलाफ 20 प्वॉइंट चार्जशीट जारी की है और प्रशासन पर करप्शन में लिप्त होने और अल्पसंख्यकों में डर पैदा करने के लिए अपनी मशीनरी का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उनके दौरे का मुख्य कारण 2026 के असैंबली इलैक्शन की तैयारियों में तेजी लाना है, खासकर उम्मीदवारों के चयन से जुड़ी प्रक्रिया और आने वाले असैंबली इलैक्शन के लिए टिकट चाहने वालों से बातचीत करना। हालांकि, उनका दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब असम कांग्रेस गंभीर अंदरूनी मसलों से जूझ रही है। 

उनके आने से कुछ दिन पहले ही, ए.पी.सी.सी. के पूर्व चीफ भूपेन कुमार बोरा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर गौरव गोगोई पर मनमानी करने का आरोप लगाया और कहा कि निजी महत्वाकांक्षाएं संभावित गठबंधनों को नुकसान पहुंचा रही हैं। ऐसी भी खबरें थीं कि बोरा भाजपा में शामिल हो सकते हैं। प्रियंका प्रार्थना के लिए कामाख्या मंदिर भी गईं और एक नागा साधु से मिलीं, जिन्हें देखने वालों ने अघोरी बाबा बताया, जिन्होंने एक फोटो ङ्क्षखचवाने की रिक्वेस्ट की। एक वीडियो, जो अब वायरल हो रहा है, उसमें बाबा गांधी के सिर पर हाथ रखते हुए और फिर कहते हुए दिख रहे हैं, ‘‘हमारी बेटी प्रधानमंत्री बनेगी।’’

मायावती चुनावों के लिए सक्रिय हुईं : 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने पार्टी संगठन को मजबूत करने की रणनीति के तहत अपनी चुनावी टीम में बड़े बदलावों का ऐलान किया है। 

एक खास कदम में, उनके भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को एक बार फिर एक अहम भूमिका दी गई है, जिसमें वह दिल्ली, गुजरात, छत्तीसगढ़ और केरल जैसे 4 राज्यों में पार्टी की ग्रोथ का ध्यान रखेंगे। वहीं, नौशाद अली को उत्तर प्रदेश के 4 सबसे अहम राजनीतिक रूप से अहम डिवीजन जैसे कानपुर, लखनऊ,आगरा और मेरठ का चीफ इंचार्ज बनाया गया है। इन इलाकों को राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम माना जाता है। नौशाद अली को इन इलाकों में कैडर में जोश भरने और दलित-मुस्लिम गठबंधन को फिर से बनाने का काम सौंपा गया है। बसपा दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच अपने पारंपरिक समर्थन आधार को मजबूत करने के साथ-साथ दूसरे सामाजिक ग्रुस तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है।-राहिल नोरा चोपड़ा
 

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