Edited By jyoti choudhary,Updated: 30 Sep, 2026 11:44 AM

सोने की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद पीली धातु अब भी ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रही है। करीब एक साल पहले की तुलना में सोना लगभग 28% महंगा हुआ है। ऐसे में ज्वेलरी खरीदने वाले कुछ ग्राहकों के बीच सस्ता सोना पाने के लिए कैश में बिना बिल खरीदारी का...
नई दिल्ली: सोने की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद पीली धातु अब भी ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रही है। करीब एक साल पहले की तुलना में सोना लगभग 28% महंगा हुआ है। ऐसे में ज्वेलरी खरीदने वाले कुछ ग्राहकों के बीच सस्ता सोना पाने के लिए कैश में बिना बिल खरीदारी का चलन बढ़ने की खबर है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी मात्रा में सोना खरीदने पर अनौपचारिक कैश डील में बाजार भाव से करीब 6% तक कम कीमत मिलने की बात सामने आई है। यह डिस्काउंट प्रति 10 ग्राम सोने पर 10,000 रुपए तक हो सकती है।
कैश पेमेंट पर क्यों मिल रहा डिस्काउंट?
कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, कुछ डीलर कैश में बिना बिल लेनदेन करने पर टैक्स और अन्य लागत में होने वाली बचत का कुछ हिस्सा ग्राहक को डिस्काउंट के रूप में देते हैं।
एक 55 वर्षीय महिला ने बताया कि बेटी की शादी के लिए ज्वेलरी खरीदते समय उन्हें प्रति 10 ग्राम सोने पर करीब 5,000 रुपए की छूट मिली। हालांकि, इस सौदे में उन्हें कोई रसीद नहीं दी गई।
3% GST से बचने की कोशिश
भारत में खुदरा ग्राहकों को सोने की खरीद पर 3% GST देना होता है। इसके अलावा आयात शुल्क और अन्य लागतों के कारण आधिकारिक चैनल से मिलने वाले सोने की कीमत बढ़ जाती है। ऐसे में कुछ खरीदार अतिरिक्त लागत से बचने के लिए कैश और बिना बिल वाली खरीदारी की ओर रुख कर रहे हैं।
बाजार से जुड़े लोगों का दावा है कि अनौपचारिक कैश मार्केट में सोना घरेलू बाजार की कीमत से करीब 200 डॉलर प्रति औंस तक कम मिल सकता है। हालांकि, इस बाजार में कीमतें तय नहीं होती और वास्तविक छूट ग्राहक और डीलर के बीच बातचीत पर निर्भर करती है।
मोलभाव से भी मिल सकता है बड़ा डिस्काउंट
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ खुदरा ग्राहक ज्वेलर से मोलभाव कर प्रति 10 ग्राम सोने पर 10,000 रुपए तक की छूट हासिल कर रहे हैं। हालांकि, यह छूट खरीदारी की मात्रा, ग्राहक की सौदेबाजी और ज्वेलर के साथ उसके संबंध पर निर्भर करती है।
आयात शुल्क बढ़ने के बाद फिर चर्चा में अनौपचारिक बाजार
भारत में सोने का अनौपचारिक बाजार कई दशकों से मौजूद है। हालांकि, जब आयात शुल्क कम था, तब आधिकारिक चैनल से बाहर जाकर सोना खरीदने का आर्थिक फायदा अपेक्षाकृत कम था। आयात शुल्क और अन्य लागत बढ़ने के साथ आधिकारिक और अनौपचारिक बाजार की कीमतों के बीच अंतर बढ़ने की बात कही जा रही है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है। शादियों, त्योहारों और पारिवारिक बचत के लिए सोने की मांग काफी मजबूत रहती है। घरेलू उत्पादन सीमित होने के कारण देश की बड़ी जरूरत आयात के जरिए पूरी होती है।
बिना बिल सोना खरीदना पड़ सकता है भारी
कम कीमत के लालच में बिना बिल सोना खरीदने पर ग्राहक को बाद में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बिना रसीद के खरीदारी होने पर सोने की शुद्धता, स्वामित्व, दोबारा बिक्री और टैक्स से जुड़े मामलों में औपचारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं रहता। इसलिए शुरुआती डिस्काउंट के साथ-साथ ऐसी खरीदारी के संभावित जोखिमों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।