Edited By jyoti choudhary,Updated: 22 Sep, 2026 01:55 PM

मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए खरीदे जाने वाले डिजिटल गोल्ड को लेकर सरकार नियामकीय व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी में है। प्रस्तावित बदलावों के तहत डिजिटल गोल्ड की हर यूनिट के बराबर वास्तविक सोना सुरक्षित रखना अनिवार्य किया जा
नई दिल्लीः मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए खरीदे जाने वाले डिजिटल गोल्ड को लेकर सरकार नियामकीय व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी में है। प्रस्तावित बदलावों के तहत डिजिटल गोल्ड की हर यूनिट के बराबर वास्तविक सोना सुरक्षित रखना अनिवार्य किया जा सकता है। इसके साथ ही इस कारोबार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) जैसे नियामकों की निगरानी में लाने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।
हर डिजिटल यूनिट के पीछे रखना होगा असली सोना
मौजूदा व्यवस्था में ग्राहक मोबाइल ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए छोटी रकम से भी डिजिटल गोल्ड खरीद सकते हैं। खरीदारी के बाद उनके खाते में सोने की मात्रा डिजिटल रूप में दिखाई जाती है और प्लेटफॉर्म आमतौर पर उसके बराबर वास्तविक सोना वॉल्ट में रखने का दावा करते हैं।
प्रस्तावित नियमों में यह व्यवस्था अनिवार्य किए जाने की बात है। यानी प्लेटफॉर्म जितनी मात्रा में डिजिटल गोल्ड बेचेंगे, उसके बराबर वास्तविक सोना सुरक्षित भंडार में रखना पड़ सकता है। इससे ग्राहकों के नाम पर दर्ज डिजिटल गोल्ड और वास्तविक रूप से उपलब्ध सोने के बीच मिलान करना आसान होगा और पारदर्शिता बढ़ सकती है।
RBI और SEBI की निगरानी का प्रस्ताव
डिजिटल गोल्ड के तेजी से बढ़ते कारोबार को देखते हुए इसके लिए औपचारिक नियामकीय ढांचा तैयार करने पर विचार चल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में RBI, SEBI, बैंकों और अन्य संबंधित पक्षों से राय मांगी है।
डिजिटल गोल्ड को प्रतिभूति के रूप में मान्यता देने का सुझाव भी सामने आया है। अगर ऐसा होता है तो प्लेटफॉर्म के संचालन, ग्राहकों के पैसे और सोने के रिकॉर्ड, स्टोरेज, खरीद-बिक्री और शिकायतों के निपटारे से जुड़े नियम बनाए जा सकते हैं।
फिलहाल SEBI के दायरे में नहीं है डिजिटल गोल्ड
डिजिटल गोल्ड में निवेश करने वाले ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि फिलहाल यह SEBI द्वारा विनियमित निवेश उत्पाद नहीं है। SEBI ने नवंबर 2025 में निवेशकों को डिजिटल गोल्ड को लेकर सावधान किया था। नियामक ने स्पष्ट किया था कि डिजिटल गोल्ड उत्पाद न तो SEBI के तहत प्रतिभूति के रूप में अधिसूचित हैं और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव के तौर पर उसके नियमन में आते हैं।
इसके चलते डिजिटल गोल्ड में निवेश करने वालों को SEBI के नियमन वाले उत्पादों जैसी निवेशक सुरक्षा उपलब्ध नहीं है। SEBI के दायरे में आने वाले सोने से जुड़े उत्पादों में गोल्ड ETF, एक्सचेंज पर कारोबार होने वाले कमोडिटी डेरिवेटिव और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट शामिल हैं।
करीब 3 अरब डॉलर का बाजार
डिजिटल गोल्ड का कारोबार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र में करीब 3 अरब डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन किया जा रहा है।
डिजिटल गोल्ड की लोकप्रियता की एक वजह यह है कि इसमें ग्राहक बहुत छोटी रकम से भी सोना खरीद सकते हैं। हालांकि, प्रस्तावित नियामकीय बदलावों के बाद इस बाजार में काम करने वाले प्लेटफॉर्म के लिए भंडारण, रिकॉर्ड और ग्राहक सुरक्षा से जुड़े नियम अधिक स्पष्ट और सख्त हो सकते हैं।