33,300 करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी में अडानी ग्रुप, लगाएगा मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट

Edited By Updated: 27 Oct, 2023 12:19 PM

adani group preparing to raise rs 33 300 crore will set up manufacturing plant

अरबपति गौतम अडानी का बिजनेस ग्रुप ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट के लिए 4 अरब डॉलर यानी 33 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का फंड जुटाने की योजना बना रहा है। यह फंड कम लागत वाली ग्रीन हाइड्रोजन के लिए मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट विकसित करने में मदद करेगा। ब्लूमबर्ग...

बिजनेस डेस्कः अरबपति गौतम अडानी का बिजनेस ग्रुप ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट के लिए 4 अरब डॉलर यानी 33 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का फंड जुटाने की योजना बना रहा है। यह फंड कम लागत वाली ग्रीन हाइड्रोजन के लिए मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट विकसित करने में मदद करेगा। ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। अडानी एंटरप्राइजेज की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनी अडानी न्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड घरेलू और इंटरनेशनल बैंक्स से फंड जुटाने में अग्रणी भूमिका निभाएगी। कंपनी कई ऋणदाताओं के साथ प्रारंभिक चरण की बातचीत कर रही है।

ग्रीन एनर्जी पर है अडानी का बड़ा दांव

हालांकि, अडानी ग्रुप से अभी तक इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं आई है। फ्रांस की टोटल एनर्जीज एसई और अडानी ग्रुप ने जून में कहा था कि वे भारत में ग्रीन हाइड्रोजन और इससे जुड़े प्रोडक्ट्स का उत्पादन करने के लिए 5 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रहे हैं। क्योंकि दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रदूषणकारी देश डीकार्बोनाइज करना चाहता है। गौतम अडानी ने पहले कहा था कि ग्रुप के पूर्वानुमानित पूंजीगत व्यय का 75% ग्रीन बिजनसेज में होगा और उनकी कंपनियों ने अगले दशक में रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर में 20 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है।

ग्रीन हाइड्रोजन है भारत का भविष्य

अडानी और उनके प्रतिद्वंद्वी मुकेश अंबानी जैसे बिजनस टाइकून ग्रीन हाइड्रोजन पर दांव लगा रहे हैं। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ प्रौद्योगिकी की ओर संक्रमण में भारत लीडरशिप स्थापित करना चाहते हैं। अडानी की वेबसाइट बताती है, 'ग्रीन हाइड्रोजन भारत की भविष्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए एक मजबूत वादा रखता है। एक ऐसे परिदृश्य की कल्पना करना मुश्किल नहीं है जहां $1/kg से कम कीमत पर ग्रीन हाइड्रोजन मिलेगी। इससे देश को जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता से बाहर निकलने में मदद मिलेगी। साथ ही ऊर्जा आयात के वित्तीय बोझ से भी भारत को मुक्ति मिलेगी।'
 

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