Rupee falling Impact: रुपए में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट, क्यों कमजोर हो रही भारतीय मुद्रा, आप पर क्या होगा असर?

Edited By Updated: 20 Mar, 2026 04:28 PM

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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया शुक्रवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। रुपया 86 पैसे टूटकर 93.75 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। दिन के कारोबार के दौरान भी रुपए में लगातार कमजोरी बनी रही और यह 93.49 प्रति डॉलर के स्तर तक फिसल गया।

बिजनेस डेस्कः अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया शुक्रवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। रुपया 86 पैसे टूटकर 93.75 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। दिन के कारोबार के दौरान भी रुपए में लगातार कमजोरी बनी रही और यह 93.49 प्रति डॉलर के स्तर तक फिसल गया।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर देखने को मिला। डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से रुपए पर दबाव बना हुआ है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी रुपए की कमजोरी की बड़ी वजह हैं।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.92 प्रति डॉलर पर खुला लेकिन शुरुआती कारोबार के बाद इसमें तेजी से गिरावट आई और यह 93 के पार निकल गया। इससे पहले बुधवार को रुपया 92.89 के अपने पिछले निचले स्तर पर बंद हुआ था। इस बीच, डॉलर इंडेक्स में भी मजबूती देखी गई और यह 0.17% बढ़कर 99.40 पर पहुंच गया, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव और बढ़ा।

क्यों टूट रहा है रुपया?

रुपए में लगातार गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे अहम वजह कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि इसमें थोड़ी गिरावट आई है लेकिन कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। तेल महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।

इसके अलावा कंपनियों द्वारा ज्यादा डॉलर खरीदने से भी रुपए पर दबाव बढ़ रहा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। मार्च में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 8 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी की है, जो पिछले एक साल से अधिक समय में सबसे बड़ा आउटफ्लो है।

आपकी पर क्या होगा असर?

रुपए की गिरावट का असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है। सबसे पहले महंगाई बढ़ती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। ऐसे में रुपए के कमजोर होने से तेल महंगा हो जाता है, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं और ट्रांसपोर्ट से लेकर रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाती हैं।

रुपए में हर 1 रुपए की गिरावट से तेल कंपनियों पर हजारों करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ता है, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं पर ही आता है। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 10% तक की बढ़ोतरी महंगाई को करीब 0.8% तक बढ़ा सकती है।

इसके अलावा, विदेश से आने वाली दवाएं महंगी हो जाती हैं। विदेश में पढ़ाई और यात्रा का खर्च भी बढ़ जाता है। होटल, टिकट और खाने-पीने तक सब महंगा पड़ता है।

सरकार पर भी बढ़ता है दबाव

रुपए की कमजोरी का असर सरकारी खजाने पर भी पड़ता है। तेल महंगा होने पर सरकार को सब्सिडी पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है। इससे विकास योजनाओं जैसे सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च कम हो सकता है।

साथ ही, आयात बढ़ने से चालू खाता घाटा (CAD) भी बढ़ता है। भारत में सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा तेल और सोने के आयात पर खर्च होती है, जिससे अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बनता है।

 

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