AI से वैश्विक वृद्धि 0.8% तेज होने का अनुमान, 'विकसित भारत' का लक्ष्य संभव: IMF MD

Edited By Updated: 20 Feb, 2026 04:41 PM

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अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलिना जॉर्जीवा ने शुक्रवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) के इस्तेमाल से वैश्विक आर्थिक वृद्धि में करीब 0.8 प्रतिशत तक की तेजी आ सकती है। उन्होंने कहा कि इस बढ़ोतरी का लाभ भारत को भी मिलेगा और...

नई दिल्लीः अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलिना जॉर्जीवा ने शुक्रवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) के इस्तेमाल से वैश्विक आर्थिक वृद्धि में करीब 0.8 प्रतिशत तक की तेजी आ सकती है। उन्होंने कहा कि इस बढ़ोतरी का लाभ भारत को भी मिलेगा और 'विकसित भारत' बनने के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। जॉर्जीवा ने यहां आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' में आयोजित एक परिचर्चा के दौरान कहा कि आईएमएफ के एक अध्ययन के अनुसार एआई में वैश्विक आर्थिक वृद्धि को उल्लेखनीय रूप से तेज करने की क्षमता है। 

उन्होंने कहा, "हमने इस विषय पर कुछ अध्ययन किया है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर एआई वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लगभग एक प्रतिशत अंक तक बढ़ा सकता है। हमारा अनुमान है कि यह बढ़ोतरी करीब 0.8 प्रतिशत की हो सकती है। इसका मतलब है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था कोविड महामारी से पहले की तुलना में अधिक तेज गति से बढ़ सकती है।" उन्होंने कहा कि तेज आर्थिक वृद्धि होना बहुत अच्छा होता है क्योंकि इससे ज्यादा अवसर और अधिक रोजगार सृजित होते हैं। 

जॉर्जीवा ने कहा, "हम भारत के लिए भी इसी तरह का प्रभाव देख रहे हैं। इसका मतलब है कि भारत के लिए विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य हासिल कर पाना संभव है।" भारत का लक्ष्य 2047 तक 'विकसित भारत' बनने और 30,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था हासिल करने का है। आर्थिक वृद्धि पर एआई के सकारात्मक प्रभावों के बावजूद जॉर्जीवा ने रोजगार बाजार के लिए इसके नकारात्मक प्रभावों को लेकर आगाह भी किया। 

आईएमएफ प्रमुख ने कहा, "हमने यह जोखिम मापा है और यह बहुत अधिक है। नौकरियों पर एआई का प्रभाव सुनामी की तरह हो सकता है।" उन्होंने कहा, "दुनिया भर में लगभग 40 प्रतिशत नौकरियां एआई से प्रभावित हो सकती हैं। उभरते बाजारों में यह आंकड़ा 40 प्रतिशत रह सकता है जबकि विकसित देशों में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत तक भी जा सकता है।" 

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