Edited By Pardeep,Updated: 08 Oct, 2026 05:48 AM

: त्यौहारों के सीजन से पहले चीनी के बढ़ते दामों से परेशान आम जनता को राहत देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चीनी की कीमतों और बाजार में इसकी सुचारू सप्लाई बनाए रखने के लिए व्यापारियों के लिए चीनी स्टॉक रखने की सीमा को घटाकर अधिकतम...
नई दिल्ली: त्यौहारों के सीजन से पहले चीनी के बढ़ते दामों से परेशान आम जनता को राहत देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चीनी की कीमतों और बाजार में इसकी सुचारू सप्लाई बनाए रखने के लिए व्यापारियों के लिए चीनी स्टॉक रखने की सीमा को घटाकर अधिकतम 1000 क्विंटल कर दिया है।
15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा नियम
सरकार द्वारा जारी किया गया यह नया नियम 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। इसके साथ ही सरकार ने व्यापारियों के पास चीनी रखने की समय सीमा को भी घटाकर 15 दिन कर दिया है। यानी अब व्यापारियों को चीनी प्राप्त होने के बाद उसे 15 दिनों से ज्यादा समय तक अपने पास स्टॉक करके रखने की अनुमति नहीं होगी।
अगस्त में 4000 क्विंटल थी सीमा, चरणबद्ध तरीके से घटाई गई
इससे पहले सरकार ने अगस्त के महीने में व्यापारियों को अधिकतम 4000 क्विंटल तक चीनी का स्टॉक रखने और उसे 30 दिनों तक होल्ड करने की इजाजत दी थी। इसके बाद 15 सितंबर से इस सीमा को घटाकर 2000 क्विंटल किया गया था और अब इसे और घटाकर 1000 क्विंटल कर दिया गया है।
जमाखोरी और सट्टेबाजी रोकने के लिए उठाया कदम
सरकार के अनुसार, इस कड़े फैसले का मुख्य उद्देश्य चीनी की कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकना है। सरकार चाहती है कि चीनी मिलों से निकलने के बाद व्यापारियों के पास लंबे समय तक न अटकी रहे, बल्कि जल्द से जल्द बाजार में पहुंचे ताकि आम लोगों को आसानी से उपलब्ध हो सके। इससे बाजार में चीनी की कृत्रिम कमी पैदा करने और सट्टेबाजी को रोकने में मदद मिलेगी।
खुदरा कीमतों में 15% और मिल स्तर पर 28% की आई गिरावट
खाद्य मंत्रालय के अनुसार, चीनी की औसत खुदरा कीमतें अगस्त के अपने उच्चतम स्तर की तुलना में लगभग 15% तक कम हो चुकी हैं। वहीं, चीनी मिलों के स्तर पर कीमतों में करीब 28% की गिरावट दर्ज की गई है। पिछले तीन हफ्तों से मिल स्तर पर चीनी के दाम लगभग स्थिर बने हुए हैं और आने वाले समय में खुदरा दरों में और कमी आने की संभावना जताई गई है।
असम और कोलकाता को मिली विशेष छूट
सरकार ने इस नए नियम से दो क्षेत्रों को मुक्त रखा है। यह नियम असम और कोलकाता व उसके आसपास के विस्तारित महानगरीय क्षेत्र पर लागू नहीं होगा। सरकार के मुताबिक, इन क्षेत्रों में पहले से ही चीनी की सीमित खपत होती है, इसलिए इन्हें इस नई स्टॉक सीमा से बाहर रखा गया है।