Edited By jyoti choudhary,Updated: 14 Sep, 2026 01:58 PM

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉपर की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। तांबा ने 14,000 डॉलर प्रति टन के आंकड़े को पार कर दिया है और वीकेंड पर यह करीब 14,240 डॉलर प्रति टन पर बंद हुआ। अमेरिका की ओर से कॉपर पर भारी टैरिफ लगाने जाने की
नई दिल्लीः अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉपर की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। तांबा ने 14,000 डॉलर प्रति टन के आंकड़े को पार कर दिया है और वीकेंड पर यह करीब 14,240 डॉलर प्रति टन पर बंद हुआ। अमेरिका की ओर से कॉपर पर भारी टैरिफ लगाने जाने की आशंका से कीमतों में बड़ा उछाल आया है। हालांकि अमेरिका अब अपने फैसले पर पुनर्विचार कर रहा है लेकिन कॉपर की बढ़ी कीमतों का असर भारतीय उद्योगों पर दिखाई देने लगा है।
ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंस्ट्रक्शन, टेलीकॉम और कृषि जैसे कई सेक्टर में कंपनियों की लागत बढ़ रही है। ऐसे में कंपनियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि बढ़ी लागत का कितना हिस्सा वे खुद वहन करें और कितना बोझ ग्राहकों पर डालें।
EV सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव
कॉपर की कीमतों में बढ़ोतरी का बड़ा असर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की पर पड़ रहा है। इसकी वजह है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में पेट्रोल-डीजल कारों की तुलना में कई गुना ज्यादा तांबे का इस्तेमाल होता है। एक सामान्य पेट्रोल-डीजल (ICE) कार में करीब 20 से 25 किलो तांबे का इस्तेमाल होता है, जबकि एक इलेक्ट्रिक कार में 80 से 85 किलो तांबा लगता है। वहीं एक इलेक्ट्रिक बस में तो 250 से 300 किलो तक तांबे की जरूरत होती है।
ऐसे में कॉपर की कीमत बढ़ने से एक पेट्रोल-डीजल कार की लागत में करीब 5,000-10,000 रुपए, जबकि इलेक्ट्रिक कार की कीमत 30,000-40,000 रुपए या उससे ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इलेक्ट्रिक बस के निर्माण की लागत में करीब 1-1.5 लाख रुपए का इजाफा होने का अनुमान है।
इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, कॉपर की महंगाई से मारुति सुजुकी पर हर महीने 204 करोड़ रुपए, टाटा मोटर्स पर 171 करोड़ रुपए, जबकि महिंद्रा पर 110 करोड़ रुपए का का अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है।
AC और फ्रिज भी हो सकते हैं महंगे
कॉपर की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ ऑटो सेक्टर तक सीमित नहीं है। घरों में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल उपकरण भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। अनुमान के मुताबिक, 1.5 टन के स्प्लिट AC की लागत में करीब 2,000-4,000 रुपए और डबल-डोर फ्रिज की लागत में करीब 1,000-2,000 रुपए तक का इजाफा हो सकता है।
कंस्ट्रक्शन और कृषि पर भी असर
कॉपर की महंगाई का असर कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर भी पड़ रहा है। अप्रैल से सितंबर के बीच कॉपर की कीमतों में करीब 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इससे ट्रांसफॉर्मर, मोटर और लिफ्ट जैसे कॉपर-आधारित उपकरणों की लागत बढ़ रही है। कृषि क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। फलों और कृषि उत्पादों को खराब होने से बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कॉपर सल्फेट की कीमतों में भी तेजी आई है। इससे किसानों की लागत बढ़ने की आशंका है।