Edited By jyoti choudhary,Updated: 08 Sep, 2026 01:31 PM

वैश्विक बाजार में तांबे की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। अमेरिका द्वारा रिफाइंड कॉपर पर व्यापक टैरिफ लगाए जाने की आशंका के बीच कारोबारियों ने बड़ी मात्रा में तांबे की आपूर्ति अमेरिका भेजनी शुरू कर दी है। इससे दुनिया के अन्य बाजारों में तांबे की
नई दिल्लीः वैश्विक बाजार में तांबे की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। अमेरिका द्वारा रिफाइंड कॉपर पर व्यापक टैरिफ लगाए जाने की आशंका के बीच कारोबारियों ने बड़ी मात्रा में तांबे की आपूर्ति अमेरिका भेजनी शुरू कर दी है। इससे दुनिया के अन्य बाजारों में तांबे की उपलब्धता कम हुई है और कीमतों में तेज उछाल आया है।
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर बेंचमार्क तीन महीने का कॉपर फ्यूचर्स 0.8% तक बढ़कर 14,533 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पहुंच गया। इसने जनवरी में बनाए गए 14,527.50 डॉलर प्रति टन के पिछले रिकॉर्ड को भी पार कर लिया। इस साल अब तक तांबे की कीमत करीब 17% बढ़ चुकी है, जबकि पिछले 12 महीनों में इसमें लगभग 47% की तेजी आई है।
भारत में भी तांबा महंगा
घरेलू बाजार में भी तेजी देखने को मिली। MCX पर सितंबर कॉपर फ्यूचर्स 1.21% यानी 16.80 रुपए बढ़कर 1,403.50 रुपए प्रति किलोग्राम के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया।
तेजी की बड़ी वजह क्या है?
तांबे की कीमतों में तेजी के पीछे लंबी अवधि में आपूर्ति और मांग के बीच बढ़ता अंतर भी एक महत्वपूर्ण कारण है। पुरानी होती तांबे की खदानें बढ़ती मांग के अनुरूप उत्पादन बढ़ाने में संघर्ष कर रही हैं।
वहीं, डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और पावर ग्रिड के विस्तार से तांबे की मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि, मौजूदा तेजी का मुख्य कारण अचानक बढ़ी अंतिम उपभोक्ता मांग नहीं, बल्कि अमेरिकी टैरिफ की आशंका के कारण वैश्विक आपूर्ति का अमेरिका की ओर स्थानांतरण है।
अमेरिकी वाणिज्य विभाग को रिफाइंड कॉपर पर टैरिफ लगाने की जरूरत को लेकर व्हाइट हाउस को सलाह देनी थी। इसके लिए 30 जून की समयसीमा थी, लेकिन दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
LME में उपलब्धता हुई कम
वैश्विक स्तर पर तांबे का स्टॉक अभी भी अपेक्षाकृत ऊंचा है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अब अमेरिका में केंद्रित हो गया है। इसके चलते LME नेटवर्क के जरिए उपलब्ध तांबे की मात्रा कम हुई है।
स्पॉट कॉपर की कीमत तीन महीने के फ्यूचर्स से ऊपर बनी हुई है। बाजार की इस स्थिति को 'बैकवर्डेशन' कहा जाता है। यह आमतौर पर निकट अवधि में आपूर्ति के दबाव या कमी का संकेत देती है।
खदानों का उत्पादन भी घटा
रिपोर्टों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में वैश्विक कॉपर माइन उत्पादन करीब 1% घटा, जबकि कॉपर कंसंट्रेट का उत्पादन लगभग 2.6% कम हुआ। इससे भविष्य में आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
Hindustan Copper के शेयरों में भी तेजी
तांबे की कीमतों में उछाल का असर घरेलू कॉपर कंपनियों के शेयरों पर भी दिखा। Hindustan Copper Ltd. के शेयर मंगलवार को 5% से अधिक चढ़कर 537.35 रुपए के इंट्राडे हाई पर पहुंच गए।