सीमा शुल्क विभाग में AI का बढ़ेगा इस्तेमाल, CBIC ने बनाया अगले दशक का रोडमैप

Edited By Updated: 16 Sep, 2026 01:48 PM

customs department should step up ai adoption to cut costs cbic chief

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने बुधवार को कहा कि सीमा शुल्क विभाग को लागत घटाने और भरोसेमंद करदाताओं के साथ प्रत्यक्ष संपर्क कम करने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई), मशीन लर्निंग और रियल-टाइम

नई दिल्लीः केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने बुधवार को कहा कि सीमा शुल्क विभाग को लागत घटाने और भरोसेमंद करदाताओं के साथ प्रत्यक्ष संपर्क कम करने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई), मशीन लर्निंग और रियल-टाइम एनालिटिक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाना चाहिए। सीमा शुल्क विभाग के लिए अगले दशक में अपनाए जाने वाले पांच प्रमुख स्तंभों की रूपरेखा पेश करते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि सीबीआईसी का लक्ष्य एक ''एकीकृत, भरोसेमंद करदाता तंत्र'' तैयार करना है, जिसमें कारोबारियों द्वारा माल एवं सेवा कर (जीएसटी), सीमा शुल्क और अन्य अप्रत्यक्ष करों के भुगतान में लगातार अनुपालन का रिकॉर्ड हो। इससे अप्रत्यक्ष कर विभाग में बेहतर तालमेल संभव हो पाएगा।

सीबीआईसी प्रमुख ने सीमा शुल्क विभाग से एमएसएमई को मार्गदर्शन देने और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का भी आह्वान किया, ताकि छोटे कारोबारी एलिजिबल मैन्युफैक्चरर इंपोर्टर (ईएमआई) जैसी सीमा शुल्क के भुगतान को टालने की योजनाओं तथा अधिकृत आर्थिक परिचालक (एईओ) का लाभ उठा सकें। चतुर्वेदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी को सीमा शुल्क के लिए ''बड़ा मददगार'' बनना चाहिए और एईओ के रूप में पंजीकृत कारोबारियों के लिए लगभग बिना प्रत्यक्ष हस्तक्षेप और लगभग कागज रहित व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना लक्ष्य होना चाहिए। 

फिलहाल आयातकों, निर्यातकों, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं, 'कस्टोडियन' या टर्मिनल संचालकों, कस्टम ब्रोकरों और गोदाम संचालकों समेत 6,000 से अधिक इकाइयों के पास एईओ प्रमाणपत्र हैं। एईओ एक स्वैच्छिक अनुपालन कार्यक्रम है, जिसके तहत भारतीय सीमा शुल्क विभाग अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला के प्रमुख हितधारकों के साथ करीबी सहयोग के माध्यम से माल की सुरक्षा को बेहतर और सुगम बनाता है। उन्होंने कहा, ''सीमा शुल्क विभाग को एआई, मशीन लर्निंग और रियल-टाइम एनालिटिक के साथ चक्रीय एवं विश्वसनीय अनुप्रयोगों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाना चाहिए। लक्ष्य लगभग बिना प्रत्यक्ष हस्तक्षेप और लगभग डिजिटल व्यवस्था की ओर बढ़ना होना चाहिए।'' 

एआई को अपनाने से कारोबारियों के लिए लेनदेन की लागत और माल को बंदरगाहों पर रखने की लागत में कमी आएगी। चतुर्वेदी ने विभिन्न एजेंसियों के बीच निर्बाध समन्वय, व्यापक डेटा एकीकरण और पारस्परिक मान्यता समझौतों (एमआरए) के वैश्विक स्तर पर पारस्परिक लाभ की जरूरत पर भी जोर दिया। भारत ने 11 देशों के साथ एईओ संबंधी एमआरए पर पहले ही हस्ताक्षर किए हैं और कई अन्य समझौते प्रक्रिया में हैं। सीबीआईसी के चेयरमैन ने कहा कि सीमा शुल्क विभाग के अगले दशक की पहचान प्रौद्योगिकी के व्यापक इस्तेमाल, अधिक एमआरए और व्यापार के लिए निर्बाध व्यवस्था से होनी चाहिए।  

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