राहत:  डूब रहे 21 को-ऑपरेटिव बैंकों के डिपोजिटर्स को मिलेगा 5 लाख तक का इंश्‍योरेंस

Edited By Updated: 22 Sep, 2021 08:01 PM

depositors 21 co operative banks get insurance to 5 lakhs

बैंकों के डूबने की स्थिति में पांच लाख रुपये तक जमा राशि पर दी गयी बीमा गारंटी के तहत विभिन्न राज्यों में 21 सहकारी बैंकों के जमाकर्ता निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम(डीआईसीजीसी) को संबंधित बैंक के माध्यम से बीमित राशि के भुगतान के लिये 15...

बिजनेस डेस्क: बैंकों के डूबने की स्थिति में पांच लाख रुपये तक जमा राशि पर दी गयी बीमा गारंटी के तहत विभिन्न राज्यों में 21 सहकारी बैंकों के जमाकर्ता निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम(डीआईसीजीसी) को संबंधित बैंक के माध्यम से बीमित राशि के भुगतान के लिये 15 अक्टूबर तक आवेदन कर सकते हैं। डीआईसीजीसी के मुख्य महाप्रबंधक वी जी वेंकटाचलपति द्वारा इस संबंध में जारी बयान में कहा गया है कि 21 सहकारी बैकों के जमाकर्ता अपनी जमा राशि के भुगतान के लिए 15 अक्टूबर तक संबंधित बैंक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

पांच लाख रुपये तक का होगा क्लेम
उनकी जमा राशि या अधिकतम पांच लाख रुपये जो अधिक हो का भुगतान इस कानून के तहत किये जाने का प्रावधान है। जिन बैंकों के जमाकर्ताओं इसके लिए आवेदन कर सकते हैं उनमें महाराष्ट्र के सबसे अधिक 11 कॉ ऑपरेटिव बैंक शामिल है जिसमें सिटी कॉ ओपरेटिव बैंक लिमिटेड, महाराष्ट्र के कपोल कॉ आपरेटिव सहकारी बैंक लिमिटेड, मराठा सहकारी बैंक लिमिटेड मुंबई, नीड्स ऑफ लाइफ को ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, पद्मश्री डॉ़ विठल राव विखे पाटिल, पंजाब एंड महाराष्ट्र कॉ ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, रुपी कॉ ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, श्री आनंद कॉ ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पुणे, मंठा अर्बन कॉ ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, सरजेरावदादा नाईक श्रीराला सहकारी बैंक लिमिटेड, इंडिपेंटेड कॉ ऑपरेटिव बैंक नासिक है।

इसके अतिरिक्त कर्नाटक के मिलत कॉ ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, पंजाब के हिन्दु कॉ ओपरेटिव बैंक लिमिटेड पठानकोट, केरल का अडूर को ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड, कर्नाटक के बिदर महिला अर्बन कॉ ओपरेटिव बैंक लिमिटेड, मध्य प्रदेश के गरहा कॉ ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड गुना, डेक्कन अर्बन कॉ ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड विजयपुर, द मुठोल कॉ ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड कर्नाटक, श्री गुरूराघवेन्द्र सहकारी बैंक नियामिता, पीपुल्स कॉ ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड कानपुर शामिल है। डीआईसीजीसी ने इसके साथ ही एक फॉर्म का प्रारूप भी जारी किया है जिसको दावेदारों को भरकर संबंधित बैंक में जमा कराना होगा और उसके बाद फिर बीमित राशि के भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जायेगी।

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