Edited By jyoti choudhary,Updated: 19 Mar, 2026 11:15 AM

गुरुवार (19 मार्च) को भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर हाहाकार मच गया। सेंसेक्स-निफ्टी में 2 फीसदी से अधिक गिरावट दर्ज की गई। लगातार तीन कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद बाजार में यह बड़ी कमजोरी देखने को मिली। गिरावट का हाल ये रहा कि बाजार खुलने के...
बिजनेस डेस्कः गुरुवार (19 मार्च) को भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर हाहाकार मच गया। सेंसेक्स-निफ्टी में 2 फीसदी से अधिक गिरावट दर्ज की गई। लगातार तीन कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद बाजार में यह बड़ी कमजोरी देखने को मिली। गिरावट का हाल ये रहा कि बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों के भीतर निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹7 लाख करोड़ की भारी गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक तनाव, खासकर United States और Israel द्वारा Iran के साउथ पार्स गैस क्षेत्र और आसपास के ढांचे को निशाना बनाए जाने से निवेशकों की चिंता बढ़ी, जिसका असर बाजार पर साफ दिखा।
30 शेयरों वाला BSE Sensex 1500 अंकों से ज्यादा टूटकर 74,750.92 के स्तर पर खुला। हालांकि, सुबह 9:42 बजे तक यह 1687.05 अंक यानी 2.20% की गिरावट के साथ 75,017.08 पर कारोबार करता नजर आया। इससे पहले बुधवार को यह लगभग 74,750 के स्तर पर बंद हुआ था।
वहीं, Nifty 50 भी 2% से अधिक की गिरावट के साथ 23,180.95 पर खुला। सुबह 9:44 बजे तक यह 507.05 अंक यानी 2.13% की गिरावट के साथ 23,270.75 पर ट्रेड कर रहा था।
गिरावट के पीछे 6 बड़े कारण
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें फिर $112 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं। Strait of Hormuz में बाधा और गैस फैसिलिटी पर हमलों ने सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिससे बाजार में घबराहट फैल गई।
फेड की सख्त टिप्पणी
फ़ेडरल रिजर्व के चेयरमैन Jerome Powell ने संकेत दिया कि महंगाई अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। फेड ने ब्याज दरों को 3.50%-3.75% के दायरे में बरकरार रखा और इस साल केवल एक बार कटौती की संभावना जताई, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।
HDFC बैंक में भारी गिरावट
HDFC Bank के शेयर करीब 8% टूट गए, जिसने बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव डाला। बैंक के चेयरमैन के इस्तीफे और मैनेजमेंट बदलाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
ग्लोबल बाजारों से नकारात्मक संकेत
अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। S&P 500, Nasdaq और Dow Jones सभी लाल निशान में बंद हुए। एशिया में जापान और हांगकांग के बाजार भी टूटे।
प्रॉफिट बुकिंग
पिछले तीन दिनों में बाजार में तेज उछाल आया था, जिसके बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। इससे गिरावट और तेज हो गई।
रुपए पर दबाव
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। महंगे कच्चे तेल के कारण आयात बिल बढ़ने की आशंका से करेंसी पर दबाव बना हुआ है।