भारत में बने वाहनों की वैश्विक बाजार में बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है निर्यात वृद्धिः समीक्षा

Edited By Updated: 29 Jan, 2026 01:58 PM

export growth reflects the increasing acceptance of indian made vehicles in the

वाहनों के निर्यात में तेज वृद्धि वैश्विक बाजारों में भारत में निर्मित वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है। बृहस्पतिवार को संसद में पेश वित्त वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में यह बात कही गई है। आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 के...

नई दिल्लीः वाहनों के निर्यात में तेज वृद्धि वैश्विक बाजारों में भारत में निर्मित वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है। बृहस्पतिवार को संसद में पेश वित्त वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में यह बात कही गई है। आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान यात्री वाहन, वाणिज्यिक वाहन, दोपहिया और तिपहिया श्रेणियों को मिलाकर 53 लाख से अधिक वाहनों का निर्यात किया गया। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में भी वाहन निर्यात में दहाई अंक में वृद्धि दर्ज की गई। इसमें कहा गया है कि कोविड महामारी के बाद मांग पक्ष में मजबूत सुधार देखने को मिला है, जिससे वाहनों का उत्पादन और बिक्री दोनों में वृद्धि हुई है। पिछले एक दशक यानी वित्त वर्ष 2014-15 से 2024-25 के दौरान वाहन उद्योग में लगभग 33 प्रतिशत उत्पादन वृद्धि दर्ज की गई है। 

आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, व्यापक विनिर्माण आधार और मजबूत वाहन कलपुर्जा परिवेश के समर्थन से यह उद्योग प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है और देश के कुल जीएसटी संग्रह में भी करीब 15 प्रतिशत योगदान करता है। इसके मुताबिक, वाहन उद्योग भारत की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख चालक बना हुआ है। भारत दोपहिया एवं तिपहिया वाहनों का दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है जबकि यात्री एवं वाणिज्यिक वाहनों के मामले में वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा बाजार है। 

आर्थिक समीक्षा कहती है कि वाहन और वाहन कलपुर्जा उद्योग के लिए ‘उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन' (पीएलआई) योजना, उन्नत रसायन सेल (एसीसी) बैटरी भंडारण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम, पीएम ई-ड्राइव योजना और पीएम ई-बस सेवा–पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म (पीएसएम) जैसी सरकारी पहल से हाल के वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके अलावा समीक्षा कहती है कि मार्च, 2024 में अधिसूचित भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना (एसएमईसी) भी इस क्षेत्र की वृद्धि में मददगार बन रही है।
 

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