Edited By jyoti choudhary,Updated: 12 Mar, 2026 11:56 AM

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा Strait of Hormuz में संकट के कारण खाड़ी देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस स्थिति में भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से तेल आयात बढ़ा दिया है। आंकड़ों के मुताबिक मार्च...
बिजनेस डेस्कः अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा Strait of Hormuz में संकट के कारण खाड़ी देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस स्थिति में भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से तेल आयात बढ़ा दिया है। आंकड़ों के मुताबिक मार्च में भारत की रूसी तेल खरीद करीब 50 प्रतिशत बढ़ गई है।
रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में भारत रूस से करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीद रहा था, जो मार्च में बढ़कर लगभग 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है। खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होने के कारण भारत ने तेजी से रूसी तेल की ओर रुख किया है।
खाड़ी देशों से आपूर्ति में भारी गिरावट
होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट का असर यह हुआ है कि फरवरी में भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल Saudi Arabia से आने वाला तेल मार्च के पहले 11 दिनों में घटकर केवल 0.4 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। वहीं Iraq से भी भारत को केवल 0.6 लाख बैरल प्रतिदिन तेल ही मिल सका।
समुद्र में है रूसी तेल की बड़ी खेप
रिपोर्ट के मुताबिक रूस से भेजी गई कच्चे तेल की एक बड़ी खेप फिलहाल समुद्र में है और तेजी से भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रही है। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में रूस से भारत के तेल आयात में और बढ़ोतरी हो सकती है।
कुल आयात में हल्की कमी
फरवरी में भारत ने कुल मिलाकर करीब 5.2 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया था, जो मार्च में घटकर लगभग 4.5 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। हालांकि कुल आयात में कमी के बावजूद इसमें रूस की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा जहाज जो भारत पहुंच रहे हैं, वे संघर्ष शुरू होने से पहले ही रवाना हो चुके थे। यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो आने वाले हफ्तों में वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है।