Edited By jyoti choudhary,Updated: 01 Apr, 2026 04:43 PM

नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, कमर्शियल एलपीजी के दाम डिरेगुलेटेड होते हैं और इन्हें बाजार के आधार पर तय किया जाता है। यही वजह...
बिजनेस डेस्कः नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, कमर्शियल एलपीजी के दाम डिरेगुलेटेड होते हैं और इन्हें बाजार के आधार पर तय किया जाता है। यही वजह है कि होटल और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर की कीमतों में हर महीने बदलाव होता है। हालांकि, देश की कुल एलपीजी खपत में इनकी हिस्सेदारी 10% से भी कम है।
क्यों बढ़े दाम?
कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई तेजी के कारण हुई है। सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस मार्च के 542 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से बढ़कर अप्रैल में 780 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पहुंच गया यानी करीब 44% की छलांग। इसके अलावा, वैश्विक सप्लाई का 20–30% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में प्रभावित होने से सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।
घरेलू ग्राहकों को राहत
सरकार ने साफ किया है कि आम घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका असर नहीं पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता के तहत 14.2 किलो घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपए पर स्थिर रखी गई है।
उज्ज्वला योजना लाभार्थियों को भी राहत
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाले सिलेंडर की कीमत भी 613 रुपए पर स्थिर है, जिसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कंपनियों पर बढ़ा बोझ
मौजूदा कीमतों पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां प्रति सिलेंडर करीब 380 रुपए का अंडर-रिकवरी झेल रही हैं। अनुमान है कि मई के अंत तक कुल नुकसान 40,000 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकता है। पिछले साल भी अंतरराष्ट्रीय कीमतों के असर से बचाने के लिए सरकार और ऑयल कंपनियों ने मिलकर करीब 60,000 करोड़ रुपए का बोझ उठाया था।