LPG डिलीवरी के लिए OTP सिस्टम बना परेशानी की वजह, हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला

Edited By Updated: 08 May, 2026 01:53 PM

otp for lpg delivery becomes a source of trouble

ईरान-इजरायल तनाव के बीच ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंताओं के माहौल में भारत में एलपीजी सिलेंडर वितरण व्यवस्था को लेकर नया विवाद सामने आया है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी के लिए लागू किए गए OTP आधारित डिजिटल ऑथेंटिकेशन सिस्टम को लेकर ग्रामीण...

बिजनेस डेस्कः ईरान-इजरायल तनाव के बीच ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंताओं के माहौल में भारत में एलपीजी सिलेंडर वितरण व्यवस्था को लेकर नया विवाद सामने आया है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी के लिए लागू किए गए OTP आधारित डिजिटल ऑथेंटिकेशन सिस्टम को लेकर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी मुद्दे पर बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करें और ऑफलाइन बुकिंग व डिलीवरी विकल्पों की निरंतरता पर विचार करें।

क्या है मामला

मामला सरकारी तेल कंपनियों द्वारा लागू किए गए डिजिटल ऑथेंटिकेशन सिस्टम से जुड़ा है। नए नियमों के तहत 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी के लिए OTP आधारित सत्यापन अनिवार्य किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता और फर्जी वितरण पर रोक लगाना बताया गया है लेकिन ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं को इससे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कोर्ट का खटखटाया दरवाजा 

एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (इंडिया) के अध्यक्ष जयप्रकाश तिवारी ने इस संबंध में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि कई गांवों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है, जिसके कारण ग्राहकों को समय पर ओटीपी नहीं मिल पाता। तकनीकी गड़बड़ियों और सर्वर समस्याओं के चलते सिलेंडर वितरण में देरी हो रही है।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि शुरुआत में यह डिजिटल सत्यापन प्रणाली केवल 50 प्रतिशत डिलीवरी पर लागू थी लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 95 प्रतिशत कर दिया गया। इसके बाद अप्रैल 2026 में जारी एक संदेश में 100 प्रतिशत डिलीवरी के लिए डिजिटल ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य बना दिया गया। साथ ही बिना सत्यापन के सिलेंडर देने पर डिस्ट्रीब्यूटर्स के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

क्या कहा कोर्ट ने

जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोड़े की खंडपीठ ने केंद्र और तेल कंपनियों को निर्देश दिया कि वे तीन सप्ताह के भीतर एसोसिएशन की मांग पर निर्णय लें। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि डिजिटल व्यवस्था जारी रखते हुए कुछ श्रेणियों के उपभोक्ताओं को छूट देने पर विचार किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने में मददगार हो सकती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लचीला मॉडल अपनाना जरूरी होगा।
 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!