Edited By jyoti choudhary,Updated: 13 Oct, 2026 06:16 PM

सरकार को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में किए गए व्यापक सुधारों से कर आधार बढ़ने की उम्मीद है। इसके लिए कर अधिकारी करदाताओं का दायरा बढ़ाने और कर चोरी पकड़ने को आंकड़ों के गहन विश्लेषण की अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करेंगे। एक
नई दिल्लीः सरकार को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में किए गए व्यापक सुधारों से कर आधार बढ़ने की उम्मीद है। इसके लिए कर अधिकारी करदाताओं का दायरा बढ़ाने और कर चोरी पकड़ने को आंकड़ों के गहन विश्लेषण की अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करेंगे। एक आधिकारिक सूत्र ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा कि कारोबारियों से उपभोक्ताओं (बी2सी) के बीच लेनदेन के लिए इलेक्ट्रॉनिक बिल व्यवस्था एक अप्रैल, 2027 से स्वैच्छिक आधार पर लागू की जाएगी। जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) इसे लागू करने में राज्यों को आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा।
जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह सुधारों को आगे बढ़ाते हुए कर प्रशासन में व्यापक बदलावों को मंजूरी दी थी। इसके तहत जीएसटी अधिकारियों का करदाताओं को गिरफ्तार करने का अधिकार समाप्त करने, आपराधिक अभियोजन की सीमा बढ़ाकर पांच करोड़ रुपए करने और अधिकांश दावों के लिए तेजी से रिफंड की व्यवस्था करने का फैसला किया गया। परिषद ने छोटे आपूर्तिकर्ताओं के लिए ई-कॉमर्स मंचों पर पंजीकरण की प्रक्रिया आसान बनाने को भी मंजूरी दी। इसके अलावा, जीएसटी पंजीकरण में बदलाव की प्रक्रिया सरल करने, जुर्माने में कमी लाने और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के दावों के लिए बिलों के मिलान की व्यवस्था की दिशा में कदम उठाने के संबंध में अधिकारियों की एक समिति गठित की गई है।
जीएसटी सुधारों के बाद कर आधार बढ़ाने की संभावनाओं से जुड़े सवाल पर सूत्र ने कहा, "हमें व्यापक सुधारों से कर आधार बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हमने जीएसटी अधिकारियों से नकद कर संग्रह बढ़ाने और जरूरत से ज्यादा दखल देने के बजाय आंकड़ों का विश्लेषण करने को कहा है। जीएसटी के तहत पंजीकृत करदाताओं की संख्या अच्छी है लेकिन इसका दायरा बढ़ाने की गुंजाइश है। हमने राज्यों से भी कर आधार बढ़ाने को कहा है।"
सूत्र ने कहा कि पिछले साल जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने के आर्थिक लाभ सामने आने के साथ कर अधिकारी अब करदाताओं पर अनिवार्य अनुपालन का दबाव डालने के बजाय उनके प्रति सहयोगात्मक रुख अपनाएंगे, ताकि उनमें भरोसा कायम किया जा सके। सरकार का मानना है कि कारोबारियों को सरल और उचित कर व्यवस्था उपलब्ध कराने से वे स्वेच्छा से नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। इसके साथ ही उन्हें बिक्री और खरीद से जुड़े लेनदेन का सही खुलासा करने के लिए प्रेरित करना भी जरूरी है।
सूत्र ने कहा कि जीएसटी दरों में बदलाव के बाद कर आधार में कितनी वृद्धि होगी, इसका फिलहाल सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। दरों में बदलाव से उपभोग के तौर-तरीके भी बदल सकते हैं, इसलिए पुराने आंकड़ों के आधार पर कर आधार में संभावित वृद्धि का आकलन नहीं किया जा सकता। फिलहाल जीएसटी के तहत करीब 1.68 करोड़ करदाता पंजीकृत हैं। सूत्रों ने कहा कि राज्य के कर अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नकद कर संग्रह बढ़े और कारोबारियों की कर देनदारी उनके आईटीसी दावों के बराबर न हो। उन्होंने कहा, "हमें अपनी प्रौद्योगिकी व्यवस्था मजबूत करने और बिना अनावश्यक दखल के काम करने का तरीका अपनाने की जरूरत है। हमें आंकड़ों के विश्लेषण में सुधार करना होगा, कमियों का पता लगाना होगा और करदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ानी होगी, ताकि उन्हें नियमों के अनुपालन के लाभ समझाए जा सकें।"
सूत्रों के मुताबिक, बी2सी इलेक्ट्रॉनिक बिल व्यवस्था से आपूर्ति श्रृंखला में आपूर्तिकर्ता से लेकर अंतिम खरीदार तक के लेनदेन के आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। फिलहाल पांच करोड़ रुपये के औसत सालाना कारोबार वाले कारोबारियों के लिए कंपनियों के बीच (बी2बी) बिक्री पर इलेक्ट्रॉनिक बिल तैयार करना अनिवार्य है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद ने सितंबर, 2024 में बी2सी इलेक्ट्रॉनिक बिल व्यवस्था के प्रायोगिक परीक्षण की सिफारिश की थी।
सूत्रों ने कहा कि सरकार कारोबारियों को बी2सी इलेक्ट्रॉनिक बिल के लाभ और कर जांच में अनुपालन पर इसके असर के बारे में बताएगी। उन्होंने कहा, "हम बी2सी इलेक्ट्रॉनिक बिल के लिए राज्यों को जीएसटीएन प्रणाली का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। चूंकि कर अधिकारियों को बी2बी और बी2सी इलेक्ट्रॉनिक बिलों से विस्तृत आंकड़े मिलेंगे, इसलिए कर प्रशासन में कारोबारियों के साथ बेहतर व्यवहार किया जा सकेगा।"