Edited By jyoti choudhary,Updated: 27 May, 2026 12:00 PM

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को एटीएम ट्रांजैक्शन से जुड़ी लापरवाही भारी पड़ गई। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एक ग्राहक की शिकायत का समय पर समाधान नहीं करने पर उपभोक्ता आयोग ने बैंक को 58,700 रुपए मुआवजा और जुर्माना देने का आदेश दिया है।
बिजनेस डेस्कः भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को एटीएम ट्रांजैक्शन से जुड़ी लापरवाही भारी पड़ गई। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एक ग्राहक की शिकायत का समय पर समाधान नहीं करने पर उपभोक्ता आयोग ने बैंक को 58,700 रुपए मुआवजा और जुर्माना देने का आदेश दिया है।
यह मामला औरंगाबाद निवासी समाधान भगवान वानखेड़े से जुड़ा है। साल 2016 में उन्होंने SBI के एटीएम से 1500 रुपए निकालने की कोशिश की लेकिन मशीन से केवल 1100 रुपए ही निकले यानी ग्राहक को 400 रुपए कम मिले। शिकायत के बावजूद बैंक ने लंबे समय तक समाधान नहीं किया। शुरुआत में यह मामला छोटी रकम का लग रहा था लेकिन बैंक की लापरवाही के कारण मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया।
ATM से कम पैसे निकले
साल 2016 में समाधान वानखेड़े औरंगाबाद के गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में लगे एसबीआई एटीएम पर पैसे निकालने पहुंचे थे। ट्रांजैक्शन पूरा होने के बाद उन्हें पता चला कि मशीन ने पूरे पैसे नहीं दिए। उन्होंने तुरंत बैंक को इसकी जानकारी दी और 4 अक्टूबर 2016 को लिखित शिकायत भी दर्ज कराई।
वानखेड़े ने कस्टमर केयर, नोडल अधिकारी और बैंकिंग लोकपाल तक शिकायत पहुंचाई लेकिन राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला जिला उपभोक्ता आयोग पहुंचा। आयोग ने माना कि बैंक ने RBI के नियमों का पालन नहीं किया और ग्राहक की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।
क्या है RBI का नियम
भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार, एटीएम विवाद का समाधान 7 कार्य दिवस के भीतर करना जरूरी होता है। तय समय में समाधान नहीं होने पर बैंक को ग्राहक को प्रतिदिन 100 रुपए मुआवजा देना पड़ता है।
आयोग ने मानी SBI की गलती
आयोग ने SBI को 477 दिनों की देरी के लिए 47,700 रुपए मुआवजा, 1,000 रुपए मुकदमेबाजी खर्च और बाद में राज्य आयोग में अपील खारिज होने पर अतिरिक्त 10,000 रुपए देने का आदेश दिया। इस तरह कुल राशि 58,700 रुपए हो गई। उपभोक्ता आयोग ने कहा कि बैंक अपनी देरी का कोई ठोस कारण पेश नहीं कर सका।