Edited By jyoti choudhary,Updated: 16 May, 2026 03:00 PM

डिजिटल पेमेंट्स के बढ़ते उपयोग के बावजूद बैंक चेक आज भी बड़े और व्यावसायिक लेन-देन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नई व्यवस्था और चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) के चलते अब चेक क्लियरिंग प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेज हो गई...
बिजनेस डेस्कः डिजिटल पेमेंट्स के बढ़ते उपयोग के बावजूद बैंक चेक आज भी बड़े और व्यावसायिक लेन-देन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नई व्यवस्था और चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) के चलते अब चेक क्लियरिंग प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेज हो गई है।
पुराने समय में चेक को फिजिकली एक बैंक से दूसरे बैंक भेजा जाता था, जिससे इसमें कई दिन लग जाते थे लेकिन अब CTS सिस्टम के तहत चेक की केवल डिजिटल इमेज स्कैन कर इलेक्ट्रॉनिक रूप से क्लियरिंग हाउस को भेजी जाती है, जिससे प्रक्रिया तेज और आसान हो गई है।
लोकल चेक के नियम
नई व्यवस्था के अनुसार लोकल चेक (Local Cheque) आमतौर पर T+1 वर्किंग डे में क्लियर हो जाते हैं यानी यदि चेक किसी वर्किंग डे पर जमा किया गया है, तो अगले कार्यदिवस तक राशि खाते में आ सकती है। कई मामलों में सुबह जल्दी जमा किए गए चेक उसी दिन शाम तक भी क्लियर हो जाते हैं।
आउटस्टेशन चेक के नियम
वहीं, आउटस्टेशन चेक (Outstation Cheque) अब पहले की तुलना में काफी तेजी से क्लियर हो रहे हैं। CTS ग्रिड प्रणाली के बाद ये चेक आमतौर पर 2 से 3 कार्यदिवसों में सेटल हो जाते हैं, जबकि पहले इसमें एक सप्ताह या उससे अधिक समय लगता था।
देरी होने पर बैंक को देना होगा हर्जाना
आरबीआई ने बैंकों को यह भी निर्देश दिया है कि चेक क्लियरिंग में अनावश्यक देरी न की जाए। यदि बैंक की लापरवाही से तय समय सीमा से अधिक देरी होती है, तो उसे ग्राहक को मुआवजा या ब्याज के रूप में हर्जाना देना होगा।
इस प्रकार, डिजिटल तकनीक और आरबीआई के नियमों ने चेक क्लियरिंग सिस्टम को अधिक तेज, पारदर्शी और उपभोक्ता-हितैषी बना दिया है।