Edited By jyoti choudhary,Updated: 07 Apr, 2026 06:09 PM

देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक एचडीएफसी बैंक ने अपने ग्राहकों को राहत देते हुए लोन की ब्याज दरों में कटौती की है। बैंक ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.05% तक की कमी की है, जो 7 अप्रैल 2026 से लागू हो चुकी है। इस...
बिजनेस डेस्कः देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक एचडीएफसी बैंक ने अपने ग्राहकों को राहत देते हुए लोन की ब्याज दरों में कटौती की है। बैंक ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.05% तक की कमी की है, जो 7 अप्रैल 2026 से लागू हो चुकी है। इस फैसले से खासतौर पर शॉर्ट-टर्म लोन लेने वाले ग्राहकों की EMI में हल्की राहत मिलने की उम्मीद है।
बैंक की वेबसाइट के मुताबिक, MCLR से जुड़े लोन पर यह कटौती सीधे तौर पर ग्राहकों को फायदा पहुंचाएगी। नई दरों के बाद बैंक का MCLR अब 8.10% से 8.55% के बीच हो गया है, जो पहले 8.15% से 8.55% के बीच था।
यह बदलाव मुख्य रूप से छोटी अवधि के लोन पर लागू किया गया है। ओवरनाइट और एक महीने की अवधि के लिए MCLR को 8.15% से घटाकर 8.10% कर दिया गया है। वहीं तीन महीने का MCLR 8.25% से घटकर 8.20% हो गया है। हालांकि, छह महीने, एक साल, दो साल और तीन साल की अवधि के MCLR में कोई बदलाव नहीं किया गया है और ये क्रमशः 8.35%, 8.35%, 8.45% और 8.55% पर ही बने हुए हैं।
क्या हुआ है बदलाव?
| अवधि |
पुराना MCLR |
नया MCLR |
बदलाव |
| ओवरनाइट |
8.15% |
8.10% |
-0.05% |
| 1 महीना |
8.15% |
8.10% |
-0.05% |
| 3 महीने |
8.25% |
8.20% |
-0.05% |
| 6 महीने |
8.35% |
8.35% |
कोई बदलाव नहीं |
| 1 साल |
8.35% |
8.35% |
कोई बदलाव नहीं |
| 2 साल |
8.45% |
8.45% |
कोई बदलाव नहीं |
| 3 साल |
8.55% |
8.55% |
कोई बदलाव नहीं |
क्या है MCLR?
MCLR वह न्यूनतम ब्याज दर होती है, जिस पर बैंक अपने ग्राहकों को लोन दे सकते हैं। यह दर 2016 में लागू की गई थी और होम लोन, पर्सनल लोन और बिजनेस लोन की ब्याज दर तय करने का अहम आधार है।
FD दरों में भी बदलाव
एचडीएफसी बैंक ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में भी हल्का बदलाव किया है। अब सामान्य ग्राहकों को 3.25% से 7% तक और सीनियर सिटीजन्स को भी इसी रेंज में ब्याज मिल रहा है। कुछ अवधि के लिए इसमें 0.10% तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
किसे मिलेगा फायदा?
इस कटौती का सबसे ज्यादा फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा जिनके लोन ओवरनाइट, एक महीने या तीन महीने के MCLR से जुड़े हैं। ऐसे उधारकर्ताओं की EMI में मामूली कमी आएगी, जिससे लोन चुकाने का बोझ थोड़ा कम होगा।