Edited By jyoti choudhary,Updated: 18 Sep, 2026 04:26 PM

भारत के सेमीकंडक्टर बाजार में एक पीढ़ी में एक बार मिलने जैसा बड़ा अवसर है और देश को अब 'भारत में तैयार' से आगे बढ़कर 'भारत में आविष्कार' पर जोर देना चाहिए तथा पूरी प्रणालियों तथा उत्पादों के विकास की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए। इन्फोसिस के
नई दिल्लीः भारत के सेमीकंडक्टर बाजार में एक पीढ़ी में एक बार मिलने जैसा बड़ा अवसर है और देश को अब 'भारत में तैयार' से आगे बढ़कर 'भारत में आविष्कार' पर जोर देना चाहिए तथा पूरी प्रणालियों तथा उत्पादों के विकास की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए। इन्फोसिस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विक्रम मेघल ने शुक्रवार को यह कहा। उन्होंने 'सेमीकॉन इंडिया 2026' में कहा, ''अगले कुछ वर्षों में एआई डेटा सेंटर पर 6.7 लाख करोड़ डॉलर खर्च होने का अनुमान है और इसमें से 50 प्रतिशत खर्च कंप्यूट, मेमोरी तथा नेटवर्किंग चिप पर होगा।''
इन्फोसिस के अधिकारी ने कहा कि अब ऐसा बदलाव हो रहा है, जिसमें चिप यह तय नहीं कर रही कि उसका इस्तेमाल किस काम में होगा बल्कि काम की जरूरत के आधार पर चिप का डिजाइन तय किया जा रहा है। मेघल ने भारत के लिए मांग के तीन प्रमुख क्षेत्रों- ''भारत के लिए बनाना, भारत में तैयार करना और भारत में आविष्कार करना'' की पहचान की। 'भारत के लिए बनाना' के तहत मेघल ने कहा कि मोबाइल फोन के स्थानीयकरण की शुरुआत हो चुकी है लेकिन अगले चार-पांच वर्षों में इसके कई गुना बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल इसमें घरेलू हिस्सेदारी केवल 23 प्रतिशत है।
उन्होंने 'भारत में तैयार (इंजीनियर्ड)' के संबंध में कहा कि आने वाले वर्षों में इंजीनियरिंग, अनुसंधान एवं विकास (ईआरएंडडी) पर खर्च मौजूदा स्तर से 1.8 गुना बढ़ने की उम्मीद है। यह देश में बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग सेवाएं देने की स्थापित क्षमता पर आधारित है। हालांकि, मेघल ने कहा कि सबसे अधिक मूल्य 'भारत में आविष्कार' से हासिल किया जा सकता है। इसकी वजह 'कस्टम चिप' का वैश्विक बाजार है, जिसके तेजी से बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि कंपनियां अपने विशेष अनुप्रयोगों के लिए चिप डिजाइन कर रही हैं उन्होंने उद्योग से दीर्घकालिक बड़े निवेश के लिए 'रणनीतिक धैर्य' रखने, उत्पाद आधारित सोच विकसित करने, नियामकीय अनुपालन पर ध्यान देने और केवल चिप पर गौर करने के बजाय पूरी प्रौद्योगिकी प्रणाली पर अपना नियंत्रण स्थापित करने का आग्रह किया।