Edited By Sahil Kumar,Updated: 18 Sep, 2026 09:19 PM

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत को 1947 में राजनीतिक आजादी तो मिल गई लेकिन उसका सांस्कृतिक और सभ्यतागत पुनर्जागरण अधूरा रह गया क्योंकि उस समय सत्ता में बैठे कुछ लोग भारतीय संस्कृति को 'कमतर' मानते थे।
कोच्चिः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत को 1947 में राजनीतिक आजादी तो मिल गई लेकिन उसका सांस्कृतिक और सभ्यतागत पुनर्जागरण अधूरा रह गया क्योंकि उस समय सत्ता में बैठे कुछ लोग भारतीय संस्कृति को 'कमतर' मानते थे। यहां मलयालम दैनिक 'जन्मभूमि' द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन 'वन एपिक, मैनी स्टोरीज़: राम कथा अक्रॉस भारत एंड बियॉन्ड' (एक महाकाव्य, कई कहानियां: पूरे भारत और उसके बाहर राम कथा) को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि आजादी के बाद भी सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद उसके उद्घाटन समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के शामिल होने का विरोध किया गया था।
उन्होंने कहा, ''जरा सोचिए, सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद उसके उद्घाटन के मौके पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के दौरे का विरोध किया गया था।'' सिंह ने कहा कि आजादी से यह उम्मीद थी कि लंबे समय से दबी हुई देश की 'आत्मा' को अभिव्यक्ति का मौका मिलेगा। उन्होंने सवाल किया कि राम मंदिर बनने में इतना समय क्यों लगा? उन्होंने कहा, ''श्री राम से बड़ा भारत की आत्मा का प्रतीक कौन है? कोई नहीं। तो फिर भगवान श्री राम का मंदिर बनने में आजादी के बाद सात दशक क्यों लग गए? भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल क्यों उठाए गए?'' उन्होंने इसके लिए 'तुष्टीकरण की राजनीति' और 'भारत पर थोपी गई धर्मनिरपेक्षता की विकृत अवधारणा' को जिम्मेदार ठहराया।
सिंह ने कहा कि भारतीय सभ्यता का सिद्धांत 'सर्व धर्म समभाव' यानी सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान है, और तर्क दिया कि धर्मनिरपेक्षता की वह अवधारणा जो धर्म को राज्य और राजनीति का विरोधी मानती है, भारतीय जीवन शैली के अनुकूल नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता के तहत धर्म को सांप्रदायिकता, परंपरा को पिछड़ापन, आस्था को कट्टरता और विश्वास को अंधविश्वास के रूप में पेश किया गया। सिंह ने कहा, ''भारत के स्वतंत्रता सेनानियों की सोच कभी ऐसी नहीं थी।''
उन्होंने अपनी बात के समर्थन में स्वतंत्रता सेनानी के.एम. मुंशी और संविधान सभा के सदस्य एच.वी. कामथ का हवाला देते हुए कहा कि धर्मनिरपेक्ष राज्य का धर्म-विरोधी या ईश्वर-विरोधी होना ज़रूरी नहीं है। सिंह ने कहा कि देश अब उस सांस्कृतिक और सभ्यतागत पुनर्जागरण से गुजर रहा है जो उनके अनुसार आजादी के बाद अधूरा रह गया था। उन्होंने कहा, ''आज, हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सांस्कृतिक और सभ्यतागत पुनर्जागरण का गवाह बन रहा है और आज हम औपनिवेशिक मानसिकता को छोड़कर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।''
सिंह ने कहा कि युवा पीढ़ी को भारत की संस्कृति और सभ्यतागत विरासत के बारे में जागरूक करने के लिए और अधिक प्रयासों की ज़रूरत है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी जागरूकता से राष्ट्रीय चेतना मजबूत होगी और भारत की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रगति में योगदान मिलेगा। इसके बाद उन्होंने 'मर्यादा पुरुषोत्तम' के रूप में भगवान राम से जुड़े नौ गुणों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि इन गुणों को अपनाकर भारत एक विकसित और महान राष्ट्र बन सकता है। सिंह ने कहा, ''मुझे कोई संदेह नहीं है कि ये नौ गुण भारत को एक महान और विकसित राष्ट्र में बदल देंगे।''
सिंह ने कहा कि 2014 से पहले भ्रष्टाचार और कुशासन के कारण भारत को निराशा और हताशा का सामना करना पड़ा था लेकिन मोदी सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक रोडमैप तैयार किया। उन्होंने कहा कि भारत ने कोविड-19 महामारी और वैश्विक युद्धों जैसे संकटों को अवसरों में बदला है और आत्मनिर्भरता व विकास की दिशा में आगे बढ़ना जारी रखा है। सिंह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने खतरों को खत्म करने के लिए सीमा पार करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद 'खत्म हो गया है'। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने और 100 से अधिक देशों को 30 करोड़ से अधिक टीकों की खुराक की आपूर्ति करने में भारत की उपलब्धियों का ज़िक्र किया। भारत की बढ़ती क्षमताओं पर सिंह ने कहा कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन लगभग 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.80 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि रक्षा निर्यात 600 करोड़ रुपये से बढ़कर 40,000 करोड़ रुपये हो गया है और भारतीय रक्षा उत्पादों का निर्यात लगभग 100 देशों को किया जा रहा है।
सिंह ने भगवान राम और रामायण के साथ केरल के जुड़ाव के बारे में कहा कि पुराणों में इस राज्य को 'परशुराम क्षेत्र' कहा गया है और परशुराम व भगवान राम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। उन्होंने कहा, ''इस तरह, केरल का भगवान राम के साथ बहुत गहरा संबंध है।'' उन्होंने कहा कि आज भी केरल में परिवार पारंपरिक रूप से शाम को इकट्ठा होते हैं, 'नीलाविलक्कु' (पारंपरिक दीपक) जलाते हैं और भगवान राम का नाम जपते हैं। सिंह ने 'जन्मभूमि' अखबार की सराहना की और जन-जागरूकता बढ़ाने में पत्रकारिता की भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने 1975 के आपातकाल का भी उल्लेख किया और कहा कि पत्रकारों और प्रकाशनों ने सेंसरशिप के बावजूद लोकतंत्र तथा संविधान को बचाने के लिए काम किया।