उद्यमियों को प्रोत्साहन मिले तो भारत बन सकता है नंबर-1: अनिल अग्रवाल

Edited By Updated: 23 Feb, 2026 04:46 PM

india can become number one if entrepreneurs are encouraged anil agarwal

वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोमवार को कहा कि परोपकारी सोच वाली उद्यमिता और सरकार के सहयोग से भारत दुनिया में नंबर-1 बन सकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए वर्तमान समय बिल्कुल अनुकूल है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अग्रवाल...

नई दिल्लीः वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोमवार को कहा कि परोपकारी सोच वाली उद्यमिता और सरकार के सहयोग से भारत दुनिया में नंबर-1 बन सकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए वर्तमान समय बिल्कुल अनुकूल है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अग्रवाल ने अमेरिका के विकास का उदाहरण देते हुए उद्यमियों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने हिस्ट्री चैनल की एक श्रृंखला का उल्लेख किया, जिसमें अमेरिका के निर्माण में राजनेताओं या वैज्ञानिकों के बजाय उद्यमियों को प्रमुख भूमिका में दिखाया गया है।

उन्होंने लिखा, “अमेरिका को किसने बनाया? न कोई राजनेता, न वैज्ञानिक और न ही कोई बुद्धिजीवी। हिस्ट्री चैनल की एक शानदार श्रृंखला में केवल उद्यमियों को चुना गया है।” श्रृंखला में कॉर्नेलियस वेंडरबिल्ट, एंड्रयू कार्नेगी, जॉन रॉकफेलर, जे.पी. मॉर्गन और हेनरी फोर्ड जैसे उद्योगपतियों का जिक्र है, जिन्होंने क्रमशः अवसंरचना, इस्पात, तेल, बैंकिंग और ऑटोमोबाइल उद्योगों की नींव रखी।

अग्रवाल ने कहा कि भारत के विकास में भी उद्यमियों की केंद्रीय भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने लिखा, “हमें अपने उद्यमियों को प्रोत्साहित करना चाहिए, उन पर विश्वास करना चाहिए और उन्हें सम्मान देना चाहिए। वे परिसंपत्तियां बनाएंगे, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करेंगे, रोजगार सृजित करेंगे और देश के राजस्व में योगदान देंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं में उलझाने के बजाय उन्हें स्व-प्रमाणीकरण की सुविधा दी जानी चाहिए ताकि वे अपनी पूरी ऊर्जा व्यवसाय निर्माण में लगा सकें। अग्रवाल ने विश्वास जताया कि भारत अमेरिका से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। उन्होंने कहा, “हमारे प्राकृतिक और मानव संसाधन विशाल हैं। हमारी महिलाओं की शक्ति और संभावनाएं अतुलनीय हैं। परोपकारी सोच के साथ गतिशील उद्यमिता, जिसे सरकार द्वारा सुगम बनाया जाए और समाज द्वारा सराहा जाए, वही देश को नंबर-1 बनाएगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के कई शीर्ष विश्वविद्यालय, पुस्तकालय, थिंक टैंक और अस्पताल उद्योगपतियों के दान से बने हैं। भारत में भी इसी तरह की उद्यमिता और सामाजिक योगदान से विकास की नई इबारत लिखी जा सकती है।

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