Edited By Kamini,Updated: 23 Feb, 2026 10:57 AM

अमेरिका ने प्रवासियों खिलाफ पहले से इतनी सख्ता की हुई है कि, इसी बीच यूनाइटेड किंगडम (यूके) से पंजाब के युवाओं के लिए चिंता भरी खबर सामने आई है।
पंजाब डेस्क : अमेरिका ने प्रवासियों खिलाफ पहले से इतनी सख्ता की हुई है कि, इसी बीच यूनाइटेड किंगडम (यूके) से पंजाब के युवाओं के लिए चिंता भरी खबर सामने आई है। दरअसल, यूनाइटेड किंगडम (यूके) के कुछ विश्वविद्यालयों ने हरियाणा और पंजाब के छात्रों के आवेदन स्वीकार करने पर अस्थायी रोक लगा दी है। यूनिवर्सिटी कालेज बर्मिंघम की ओर से वहां की सरकार के नये दिशा-निर्देशों के बारे में हरियाणा व पंजाब के अभिभावकों को इस बारे में सचेत किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, यूके की कई प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों ने इन दोनों राज्यों के कुछ छात्रों को दाखिला देने पर रोक लगा दी है। इस फैसले से उन हजारों विद्यार्थियों की योजनाओं पर असर पड़ा है, जो उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन जाने की तैयारी कर रहे थे। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कुछ संस्थानों ने पाया कि पंजाब और हरियाणा से आने वाले कई छात्र स्टडी वीजा पर यूके पहुंचने के बाद पढ़ाई बीच में छोड़कर नौकरी करने लगते हैं। इससे यूनिवर्सिटियों की वीजा अनुपालन (वीजा कंप्लायंस) रेटिंग प्रभावित होती है।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में एजेंटों के माध्यम से फर्जी शैक्षणिक सर्टीफिकेट और गलत बैंक दस्तावेज जमा कराए गए। ऐसे मामलों को देखते हुए कई यूनिवर्सिटियों ने इन क्षेत्रों से आने वाली कुछ श्रेणी की आवेदनों को स्वीकार करना बंद कर दिया है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यह कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं है और न ही यूके सरकार की ओर से लगाया गया कानूनी बैन है। यह फैसला संबंधित शिक्षण संस्थानों ने अपने स्तर पर जोखिम कम करने के लिए लिया है। ये पाबंदी खास तौर पर पंजाब और हरियाणा के विद्यार्थियों पर लगाई गई है, लेकिन कुछ मामलों में गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के छात्रों के आवेदनों की भी कड़ी जांच की जा रही है।
इंटरनल कंप्लायंस रिव्यू (आंतरिक अनुपालन समीक्षा) और इंटरनेशनल स्टूडेंट स्पांसरशिप को लेकर यूके गवर्नमेंट ने अपने विश्वविद्यालयों व कालेजों को नए बदलावों को लागू करने के आदेश दिए हैं। यह दिशा निर्देश क्या हैं और इन्हें क्यों लागू किया जा रहा है, यह तो नहीं बताया जा रहा है, लेकिन इतना स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पूरी तरह से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए यूनिवर्सिटी कालेज बर्मिंघम खास इलाकों और प्रोग्राम पर असर डालने वाली नई पालिसी ला रहा है।
वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि जो छात्र वास्तव में पढ़ाई के उद्देश्य से विदेश जाना चाहते हैं, उन्हें पूरी पारदर्शिता के साथ आवेदन करना चाहिए। केवल मान्यता प्राप्त संस्थानों में ही अप्लाई करें और सभी दस्तावेज असली रखें, क्योंकि किसी भी तरह की धोखाधड़ी भविष्य के अवसरों को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकती है।
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