Infosys ने 300 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, श्रम मंत्रालय से कार्रवाई की मांग

Edited By Updated: 07 Feb, 2025 04:52 PM

info fired more than 300 employees union raised objection

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा प्रदाता कंपनी इन्फोसिस ने 300 से अधिक नए लोगों (पहली बार नौकरी करने वाले-फ्रेशर्स) को नौकरी से निकाल दिया है। सूत्रों के अनुसार, इन कर्मचारियों ने कंपनी के मैसूर परिसर में शुरुआती प्रशिक्षण लिया था लेकिन तीन प्रयासों...

बिजनेस डेस्कः सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा प्रदाता कंपनी इन्फोसिस ने 300 से अधिक नए लोगों (पहली बार नौकरी करने वाले-फ्रेशर्स) को नौकरी से निकाल दिया है। सूत्रों के अनुसार, इन कर्मचारियों ने कंपनी के मैसूर परिसर में शुरुआती प्रशिक्षण लिया था लेकिन तीन प्रयासों के बाद भी वे आंतरिक मूल्यांकन में उत्तीर्ण नहीं हो पाए। हालांकि, आईटी कर्मचारी यूनियन एनआईटीईएस ने कहा कि इस कदम से प्रभावित होने वाले नए कर्मचारियों की संख्या बहुत अधिक है। 

यूनियन ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के समक्ष आधिकारिक शिकायत दर्ज कर कंपनी के खिलाफ तत्काल हस्तक्षेप और सख्त कार्रवाई की मांग करने की धमकी दी है। इस संबंध में भेजे गए ई-मेल के जवाब में बेंगलुरु मुख्यालय वाली आईटी सेवा कंपनी ने कहा, “इन्फोसिस में हमारी नियुक्ति प्रक्रिया बहुत सख्त है, जिसमें सभी नए कर्मचारियों को हमारे मैसूर परिसर में व्यापक आधारभूत प्रशिक्षण लेने के बाद आंतरिक मूल्यांकन में सफल होने की उम्मीद होती है।” 

कंपनी ने कहा कि सभी नए कर्मचारियों को मूल्यांकन में सफल होने के लिए तीन मौके मिलते हैं, जिसमें विफल होने पर वे संस्थान में बने नहीं रह पाएंगे। कंपनी ने कहा कि यह उपनियम ‘उनके अनुबंध में भी उल्लिखित है।' इन्फोसिस ने कहा, “यह प्रक्रिया दो दशक से अधिक समय से अस्तित्व में है और हमारे ग्राहकों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिभा की उपलब्धता सुनिश्चित करती है।” घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने बताया कि प्रभावित नए लोगों की संख्या 300 से कुछ अधिक है। इस बीच, नैसेंट इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉयज सीनेट (एनआईटीईएस) ने दावा किया कि संख्या बहुत अधिक थी और प्रभावित नए कर्मचारियों को कुछ महीने पहले अक्टूबर, 2024 में ही कंपनी में शामिल किया गया था। 

इसमें कहा गया, “इन कर्मचारियों को अपने ‘ऑफर लेटर' प्राप्त करने के बाद पहले ही दो साल का लंबा इंतजार सहना पड़ा था, और एनआईटीईएस और प्रभावित उम्मीदवारों के निरंतर प्रयासों के बाद ही उनका शामिल होना संभव हो सका।” एनआईटीईएस ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को मैसूर परिसर के बैठक कक्ष में बुलाया गया, तथा उनसे ‘आपसी अलगाव' पत्र पर हस्ताक्षर करने को कहा गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है। एनआईटीईएस ने कहा, “स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनआईटीईएस श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के समक्ष एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कर रही है, जिसमें इन्फोसिस के खिलाफ तत्काल हस्तक्षेप और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।” 
 

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