रीढ़ की सर्जरी का क्लेम खारिज करना बीमा कंपनी को पड़ा महंगा, अब देने होंगे ₹1.64 लाख

Edited By Updated: 20 Oct, 2026 05:09 PM

insurance company pays heavy price for rejecting a claim for spinal surgery

बीमा क्लेम खारिज करने के एक मामले में गुजरात के अहमदाबाद स्थित अतिरिक्त जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को एक नाबालिग लड़की के इलाज का खर्च चुकाने का निर्देश दिया है। आयोग ने कंपनी को रीढ़

अहमदाबाद: बीमा क्लेम खारिज करने के एक मामले में गुजरात के अहमदाबाद स्थित अतिरिक्त जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को एक नाबालिग लड़की के इलाज का खर्च चुकाने का निर्देश दिया है। आयोग ने कंपनी को रीढ़ की हड्डी की सर्जरी पर हुए ₹1.60 लाख के खर्च की भरपाई करने के साथ ही ₹4,000 कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है।

मामला वर्ष 2019 का है, जब 13 वर्षीय लड़की को रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या के उपचार के लिए अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां उसकी L5-S1 प्रोलैप्स्ड इंटरवर्टेब्रल डिस्क (PID) की सर्जरी की गई थी। यह समस्या रीढ़ के निचले हिस्से की डिस्क से संबंधित है।

बीमा कंपनी ने किस आधार पर खारिज किया क्लेम?

परिवार के अनुसार, लड़की को पीठ के निचले हिस्से में दर्द था, जो उसके बाएं पैर तक फैल रहा था। इलाज के बाद उसके माता-पिता ने अपनी मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत अस्पताल में हुए ₹1.60 लाख के खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए बीमा कंपनी के पास दावा पेश किया।

हालांकि, बीमा कंपनी ने पॉलिसी की शर्तों का हवाला देते हुए क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी का कहना था कि पॉलिसी में मोटापे के उपचार से संबंधित खर्च शामिल नहीं हैं। मेडिकल रिकॉर्ड के मुताबिक, लड़की का वजन 72 किलोग्राम और बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 26.1 था। कंपनी ने इसी आधार पर उसके उपचार को वजन से संबंधित प्रक्रिया मानते हुए भुगतान से इनकार कर दिया।

अस्पताल ने आयोग के सामने रखी अपनी बात

बीमा कंपनी के फैसले से असंतुष्ट परिवार ने अहमदाबाद के अतिरिक्त जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई। परिवार का तर्क था कि लड़की की सर्जरी वजन कम करने के लिए नहीं, बल्कि रीढ़ की हड्डी की गंभीर समस्या के उपचार के लिए की गई थी।

सुनवाई के दौरान अस्पताल ने भी स्पष्ट किया कि मरीज का उपचार रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या के लिए किया गया था और उसे मोटापे के इलाज से संबंधित कोई प्रक्रिया नहीं दी गई थी। डॉक्टरों के अनुसार, डिस्क की समस्या इडियोपैथिक यानी अज्ञात कारणों से संबंधित थी। इसे मोटापे के कारण हुई समस्या नहीं बताया गया।

आयोग ने बीमा कंपनी को भुगतान का दिया निर्देश

मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष और अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी पर विचार करने के बाद उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को ₹1.60 लाख की क्लेम राशि चुकाने का आदेश दिया। इसके अलावा, कंपनी को कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में ₹4,000 भी देने होंगे।

इस आदेश के साथ बीमा कंपनी को कुल ₹1.64 लाख का भुगतान करना होगा। यह मामला दर्शाता है कि बीमा क्लेम पर निर्णय लेते समय इलाज की वास्तविक जरूरत और चिकित्सकीय तथ्यों पर विचार करना महत्वपूर्ण है। केवल मरीज के वजन या BMI के आधार पर किसी सर्जरी को मोटापे का उपचार मानना विवाद का कारण बन सकता है।

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