Edited By jyoti choudhary,Updated: 27 Oct, 2026 01:26 PM

क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो (Zepto) को किराने का सामान अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से ज्यादा कीमत पर बेचना भारी पड़ गया। तेलंगाना के रंगारेड्डी जिला उपभोक्ता आयोग ने इसे अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए कंपनी को ग्राहक को 2,000 रुपए मुआवजा
नई दिल्लीः क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो (Zepto) को किराने का सामान अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से ज्यादा कीमत पर बेचना भारी पड़ गया। तेलंगाना के रंगारेड्डी जिला उपभोक्ता आयोग ने इसे अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए कंपनी को ग्राहक को 2,000 रुपए मुआवजा और 5,000 रुपए मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है। इसके अलावा, कंपनी को आयोग के कंज्यूमर लीगल एड अकाउंट में 50,000 रुपए जमा कराने होंगे। इस तरह कुल 57,000 रुपए देने का आदेश दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला हैदराबाद के उप्पल में रहने वाले 35 वर्षीय वकील के. शिव गणेश से जुड़ा है। उन्होंने 28 सितंबर 2023 को Zepto ऐप से कच्चा कटहल और एमटीआर 3 मिनट पोहा ऑर्डर किया था। ऑर्डर का कुल बिल 293 रुपए था, जिसमें 288 रुपए सामान की कीमत और 5 रुपए हैंडलिंग चार्ज शामिल था।
ग्राहक का आरोप था कि ऐप पर उत्पादों की कीमत उनकी पैकेट पर लिखी MRP से ज्यादा दिखाई गई। इसके बाद बढ़ी हुई कीमत पर छूट भी दिखाई गई, जिसे उन्होंने भ्रामक बताते हुए कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
Zepto ने क्या सफाई दी?
कंपनी ने आयोग के सामने दलील दी कि वह उत्पादों की निर्माता नहीं है, बल्कि दूसरे निर्माताओं का सामान बेचती है। उसने यह भी कहा कि उत्पादों की कीमतों या जानकारी में अनजाने में गलती हो सकती है।
Zepto के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद कीमतों से जुड़ी गलती सुधार दी गई थी। कंपनी ने ग्राहक को पूरे ऑर्डर का पैसा लौटाने की पेशकश भी की थी, लेकिन ग्राहक ने इसे स्वीकार नहीं किया।
आयोग ने क्यों ठहराया दोषी?
आयोग ने बिल, ऑर्डर के स्क्रीनशॉट और दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत जैसे सबूतों की जांच की। आयोग ने पाया कि सामान MRP से ज्यादा कीमत पर बेचा गया और बढ़ी हुई कीमत पर डिस्काउंट दिखाया गया। उसने कंपनी की तकनीकी गलती वाली दलील को स्वीकार नहीं किया।
ग्राहक ने 5 लाख रुपए मुआवजे और 50,000 रुपए मुकदमे के खर्च की मांग की थी लेकिन आयोग ने इससे कम राशि देने का आदेश दिया।