HDFC Bank की दुबई ब्रांच में बड़ा खुलासा, 5 साल तक छिपाई सच्चाई

Edited By Updated: 03 Apr, 2026 02:55 PM

major revelation at hdfc bank s dubai branch truth concealed for 5 years

दुबई के वित्तीय नियामक दुबई फाइनेंशियल सर्विसेज अथॉरिटी (DFSA) ने HDFC Bank की दुबई स्थित दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) शाखा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच में सामने आया है कि बैंक ने ग्राहकों को जोखिमभरे क्रेडिट सुइस के AT-1...

बिजनेस डेस्कः दुबई के वित्तीय नियामक दुबई फाइनेंशियल सर्विसेज अथॉरिटी (DFSA) ने HDFC Bank की दुबई स्थित दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) शाखा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच में सामने आया है कि बैंक ने ग्राहकों को जोखिमभरे क्रेडिट सुइस के AT-1 बॉन्ड्स की गलत बिक्री (मिस-सेलिंग) के मामले में करीब पांच साल तक नियामक को जानकारी नहीं दी। इस मामले में DFSA ने बैंक ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है।

क्या है मामला?

DFSA के अनुसार, HDFC बैंक की DIFC शाखा की कंप्लायंस और इंटरनल ऑडिट टीम को 2020 से ही अतिरिक्त टियर-1 (AT-1) बॉन्ड्स की गलत बिक्री की जानकारी थी। इसके बावजूद न तो इस समस्या का समाधान किया गया और न ही समय पर नियामक को सूचित किया गया। ग्राहकों को इन बॉन्ड्स को “कैपिटल प्रोटेक्टेड” और सुरक्षित निवेश के रूप में पेश किया गया, जबकि बाद में ये लगभग बेकार हो गए।

नियामक की सख्ती

मामले की गंभीरता को देखते हुए DFSA ने सितंबर 2025 में HDFC बैंक की दुबई शाखा पर नए ग्राहक जोड़ने और नया व्यवसाय शुरू करने पर रोक लगा दी थी। यह कदम उन बॉन्ड्स की बिक्री के कारण उठाया गया था जो बाद में पूरी तरह बेकार हो गए थे। नियामक ने इसे पारदर्शिता और ईमानदारी के मानकों का उल्लंघन बताया। बैंक की एथिक्स कमेटी ने भी माना कि ये गलत प्रथाएं जानबूझकर अपनाई गई थीं।

कैसे सामने आया मामला?

यह मामला 2017-18 के दौरान शुरू हुआ, जब कई एनआरआई ग्राहकों ने आरोप लगाया कि उन्हें AT-1 बॉन्ड्स को सुरक्षित फिक्स्ड डिपॉजिट बताकर बेचा गया। कुछ मामलों में ग्राहकों से खाली कागजों पर हस्ताक्षर तक कराए गए। 

जुलाई 2025 में एक ग्राहक की शिकायत के बाद नागपुर की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इस मामले की जांच शुरू की, जिसमें बैंक के चार अधिकारियों के नाम सामने आए। इसके बाद Deloitte और Kroll जैसी एजेंसियों ने भी जांच की।

बैंक ने मानी चूक

मई 2025 की आंतरिक रिपोर्ट में बैंक ने स्वीकार किया कि 2017 से 2024 के बीच 61 रिलेशनशिप मैनेजर्स ने 1707 ऐसे ग्राहकों को सेवाएं दीं जो DIFC के आधिकारिक ग्राहक नहीं थे। साथ ही, इन ग्राहकों के साथ हुए संचार का कोई ठोस रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं था।

यह पूरा मामला बैंकिंग सेक्टर में ग्राहक सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
 

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