No UPI, only Cash, दुकानदार करने लगे UPI से परहेज, व्यापारियों को किस बात का डर?

Edited By Updated: 14 Jul, 2025 05:49 PM

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देशभर में डिजिटल पेमेंट का चलन तेज़ी से बढ़ा है लेकिन अब इसके उलट एक चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आ रहा है। बेंगलुरु, जो भारत का टेक हब और डिजिटल पेमेंट की राजधानी माना जाता है, वहां छोटे दुकानदार अब UPI लेने से मना कर रहे हैं। कई मोहल्लों और गलियों...

बिजनेस डेस्कः देशभर में डिजिटल पेमेंट का चलन तेज़ी से बढ़ा है लेकिन अब इसके उलट एक चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आ रहा है। बेंगलुरु, जो भारत का टेक हब और डिजिटल पेमेंट की राजधानी माना जाता है, वहां छोटे दुकानदार अब UPI लेने से मना कर रहे हैं। कई मोहल्लों और गलियों में QR कोड हटा दिए गए हैं और उनकी जगह अब हाथ से लिखे नोट दिखाई दे रहे हैं – "UPI नहीं, सिर्फ कैश"।

UPI का इस्तेमाल बंद क्यों कर रहे हैं दुकानदार?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, कई दुकानदार UPI पेमेंट से मिलने वाली पारदर्शिता के कारण परेशान हैं। इन ट्रांजैक्शनों के रिकॉर्ड से जीएसटी विभाग की नजर उन पर पड़ रही है और बिना रजिस्ट्रेशन वाले व्यापारियों को नोटिस मिलने लगे हैं। कुछ मामलों में ये टैक्स नोटिस लाखों रुपए के हैं।

डर का माहौल: जीएसटी नोटिस और बेदखली की आशंका

बेंगलुरु स्ट्रीट वेंडर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव एडवोकेट विनय के. श्रीनिवास के मुताबिक, छोटे व्यापारियों में ये डर गहराता जा रहा है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन से उनका डेटा टैक्स विभाग तक पहुंच रहा है, जिससे उन्हें नोटिस और बेदखली जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इस वजह से दुकानदार अब कैश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

क्या कहता है GST कानून?

जीएसटी कानून के तहत अगर किसी व्यापारी की सालाना कमाई 40 लाख रुपए (सामान) या 20 लाख रुपए (सेवा) से अधिक है, तो उसे रजिस्ट्रेशन और टैक्स भुगतान करना अनिवार्य है। टैक्स विभाग का कहना है कि नोटिस केवल उन व्यापारियों को भेजे गए हैं जिनकी यूपीआई ट्रांजेक्शन से यह साबित होता है कि वे जीएसटी सीमा में आते हैं।

दूसरे राज्यों पर भी असर की आशंका

बेंगलुरु के चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रीनिवासन रामकृष्णन ने चेतावनी दी है कि बेंगलुरु एक "टेस्ट केस" बन सकता है। यदि इस मॉडल से टैक्स वसूली बढ़ती है, तो दूसरे राज्य भी इसी राह पर चल सकते हैं। अब मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों के स्ट्रीट वेंडर्स पर भी अधिकारियों की नजर है।

क्या UPI का इस्तेमाल वाकई घटेगा?

UPI के खिलाफ यह बदलाव अभी सीमित क्षेत्रों में है, लेकिन अगर टैक्स का डर बना रहा, तो यह पूरे देश में डिजिटल लेनदेन को प्रभावित कर सकता है। सरकार को चाहिए कि वह छोटे व्यापारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश और सुरक्षा दे, ताकि UPI का भरोसा बरकरार रहे।
 
 

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