Oil Prices Drop: बाजार में हलचल के बीच सस्ता हुआ तेल, अचानक क्यों आई गिरावट, जानें वजह?

Edited By Updated: 14 Apr, 2026 12:59 PM

oil prices amidst market volatility why the sudden decline

मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को एशियाई बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत के संकेत मिलने से सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई, जिससे बाजार पर दबाव घटा।

बिजनेस डेस्कः मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को एशियाई बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत के संकेत मिलने से सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई, जिससे बाजार पर दबाव घटा।

Brent Crude Oil की कीमत 1.86 डॉलर यानी 1.87% गिरकर 97.50 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि WTI Crude Oil 2.25 डॉलर यानी 2.27% टूटकर 96.83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

पिछले सत्र में जोरदार तेजी

हालांकि, पिछले कारोबारी सत्र में दोनों बेंचमार्क में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। ब्रेंट में 4% से ज्यादा और WTI में करीब 3% की बढ़त दर्ज की गई थी। यह उछाल अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू करने के बाद आया था।

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तनाव का सबसे बड़ा केंद्र Strait of Hormuz बना हुआ है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अमेरिकी सेना ने संकेत दिया है कि नाकाबंदी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों के बंदरगाहों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है।

इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान समझौते के लिए तैयार है, जबकि शहबाज शरीफ ने तनाव कम करने के प्रयास जारी रहने की बात कही। विशेषज्ञों का मानना है कि बातचीत की उम्मीद ने फिलहाल तेल की कीमतों को नीचे खींचा है।

IEA, IMF और World Bank की सलाह

रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 1 करोड़ बैरल प्रतिदिन की सप्लाई बाजार से प्रभावित हुई है। अगर नाकाबंदी लंबी चली, तो 30 से 40 लाख बैरल प्रतिदिन अतिरिक्त सप्लाई भी बाधित हो सकती है। वहीं, International Energy Agency, International Monetary Fund और World Bank ने देशों को ऊर्जा भंडारण बढ़ाने और निर्यात पर रोक लगाने से बचने की सलाह दी है।

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ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि शिपिंग सामान्य होने पर आने वाले हफ्तों में तेल की कीमतें फिर से उछाल पर पहुंच सकती हैं, जबकि OPEC ने दूसरी तिमाही के लिए वैश्विक मांग का अनुमान 5 लाख बैरल प्रतिदिन घटा दिया है।
 

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