Edited By jyoti choudhary,Updated: 14 Apr, 2026 12:18 PM

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराता दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), World Bank और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात के चलते तेल-गैस और उर्वरकों की कीमतें लंबे समय तक ऊंची...
बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराता दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), World Bank और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात के चलते तेल-गैस और उर्वरकों की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।
इन तीनों वैश्विक संस्थाओं के प्रमुखों ने हाल ही में बैठक कर युद्ध के ऊर्जा और आर्थिक प्रभावों की समीक्षा की। संयुक्त बयान में कहा गया कि संघर्ष के कारण बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन हुआ है, रोजगार पर असर पड़ा है और यात्रा-पर्यटन गतिविधियां भी कमजोर हुई हैं, जिन्हें सामान्य होने में समय लगेगा।
रोजगार को लेकर बढ़ी चिंताएं
रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है लेकिन ऊर्जा आयात करने वाले और निम्न-आय वाले देश सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। तेल, गैस और उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी से खाद्य सुरक्षा और रोजगार को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो जाए लेकिन बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण आपूर्ति पहले जैसी होने में समय लगेगा।
अन्य उद्योगों पर भी बढ़ सकता है दबाव
इस बीच, कुछ तेल और गैस उत्पादक देशों को निर्यात राजस्व में भी भारी नुकसान झेलना पड़ा है। आपूर्ति में बाधाओं के कारण कच्चे माल की कमी से ऊर्जा, खाद्य और अन्य उद्योगों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
तीनों संस्थानों ने भरोसा दिलाया है कि वे हालात पर लगातार नजर बनाए रखेंगे और जरूरत पड़ने पर प्रभावित देशों को नीतिगत सलाह और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएंगे, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता की दिशा में वापस लाया जा सके।